डेस्क : ईरान ने अमेरिका की ओर से लगाए गए नए आर्थिक प्रतिबंधों की कड़ी निंदा करते हुए इन्हें ‘आर्थिक आतंकवाद’ और ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ करार दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि अमेरिकी प्रतिबंध ईरानी नागरिकों के मूलभूत मानवाधिकारों को प्रभावित करते हैं और अमेरिका की दशकों पुरानी शत्रुतापूर्ण नीति का हिस्सा हैं।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि अमेरिका द्वारा लगाए गए व्यापक आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंध 19 अगस्त 1953 के तख्तापलट की बरसी के आसपास लगाए गए हैं। मंत्रालय के मुताबिक, यह कदम ईरान के प्रति अमेरिकी नीति में पिछले 73 वर्षों से जारी शत्रुता को दर्शाता है।
मंत्रालय ने कहा कि ईरान पर लगाए गए अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंध ‘आर्थिक आतंकवाद’ और ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ हैं। उसने प्रतिबंध लगाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई और उन्हें उनके कथित अपराधों के लिए जिम्मेदार ठहराने की मांग भी की।
प्रतिबंधों से झुकने वाला नहीं ईरान
ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि पिछले डेढ़ वर्ष में अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान के खिलाफ किए गए सैन्य दबाव और कार्रवाइयों के बावजूद तेहरान अपने रुख से पीछे नहीं हटेगा। मंत्रालय ने दावा किया कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य ईरान को अमेरिकी मांगों के सामने झुकने के लिए मजबूर करना था, लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हुआ।
बयान में कहा गया कि आर्थिक प्रतिबंध और दबाव युद्ध तथा सैन्य आक्रामकता का ही दूसरा रूप हैं। ईरान ने अमेरिका पर वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने का भी आरोप लगाया।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों में विश्वास रखने वाले देशों से अमेरिकी कदमों के प्रति उदासीन नहीं रहने की अपील की। मंत्रालय ने कहा कि प्रतिबंधों की नीति पहले भी विफल रही है और इसे दोहराने से अमेरिका को फिर वही परिणाम भुगतने पड़ेंगे।
ट्रंप ने बताया ‘सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई’
ईरान का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस घोषणा के बाद आया है, जिसमें उन्होंने ईरान के खिलाफ अब तक की ‘सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई’ शुरू करने की बात कही थी। ट्रंप ने कहा कि यह अभियान अभूतपूर्व आर्थिक युद्ध और अलगाव की दिशा में होगा।
ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी कार्रवाई का निशाना ईरान की आर्थिक गतिविधियों की प्रमुख कड़ियां होंगी। इनमें तेल तस्करी नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन, मनी एक्सचेंज, जहाज पंजीकरण और ईरान से जुड़ी फ्रंट कंपनियां शामिल हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि जो देश या संस्थान ईरान को वित्तीय, कारोबारी या सरकारी सहायता देंगे, उन्हें भी गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। ट्रंप ने यह भी दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा तनाव
वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य भी विवाद का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
ट्रंप ने दावा किया कि फिलहाल जलडमरूमध्य खुला है और कई जहाज वहां से गुजर रहे हैं। उन्होंने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को प्रभावी बताते हुए इसे पूरी तरह सफल होने का दावा किया।
वहीं, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा है कि अमेरिका द्वारा कुछ प्रमुख शर्तें पूरी किए जाने तक ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने पर विचार नहीं करेगा। इन शर्तों में नाकेबंदी हटाना, ईरान की जब्त संपत्तियां जारी करना और तेल प्रतिबंधों में राहत शामिल हैं।
ईरानी विदेश मंत्री ने ट्रंप के बयान पर साधा निशाना
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने ट्रंप की ‘आर्थिक डी-डे’ वाली घोषणा पर निशाना साधते हुए कहा कि यह अमेरिका की अपनी आर्थिक समस्याओं से ध्यान भटकाने का प्रयास है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका पर अभूतपूर्व कर्ज और बढ़ती ब्याज लागत का दबाव है।
अराघची ने कहा कि विफल नीतियों को दोहराने से अमेरिका को फिर हार का सामना करना पड़ेगा और ईरानी जनता में उसके प्रति विरोध और बढ़ेगा।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि तेहरान अपनी सुरक्षा, स्वतंत्रता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए अमेरिकी सैन्य, आर्थिक, राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक दबावों का सामना करता रहेगा। मंत्रालय ने कहा कि ईरान अपनी घरेलू क्षमताओं और दशकों के अनुभव के आधार पर अमेरिकी दबाव का मुकाबला करने के लिए उपलब्ध सभी साधनों का इस्तेमाल करेगा।








