छोटा आकार, बड़ी क्षमता: ‘अलख’ ड्रोन जीपीएस के बिना भी करेगा निगरानी

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डेस्क : देश में ड्रोन तकनीक को नई दिशा देते हुए IIT कानपुर से जुड़ी टीम ने ऐसा स्वदेशी ड्रोन विकसित किया है, जो GPS उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में भी अपने मिशन को जारी रखने में सक्षम है। ‘अलख’ नाम के इस माइक्रो ड्रोन को निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और अलग-अलग मिशन जरूरतों के अनुरूप इस्तेमाल किया जा सकता है।

IIT कानपुर के स्टार्टअप EndureAir Systems के साथ विकसित किए गए इस ड्रोन का आकार बेहद छोटा रखा गया है। इसे आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सकता है और सीमित जगह से भी उड़ान भरने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके कारण कठिन और संवेदनशील इलाकों में इसकी तैनाती आसान हो सकती है।

GPS जाम होने पर भी काम करने की क्षमता

आधुनिक युद्ध और सुरक्षा अभियानों में GPS सिग्नल को जाम करना एक बड़ी चुनौती बन चुका है। ऐसे में GPS-denied वातावरण में काम करने वाले ड्रोन सुरक्षा बलों के लिए अहम साबित हो सकते हैं।

‘अलख’ को इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। इसमें एंटी-जैमिंग और वैकल्पिक नेविगेशन क्षमताओं पर काम किया गया है, जिससे GPS सिग्नल बाधित होने की स्थिति में भी मिशन जारी रखने की क्षमता मिलती है।

निगरानी से लेकर ISR मिशन तक

ड्रोन को मुख्य रूप से निगरानी और ISR यानी Intelligence, Surveillance and Reconnaissance मिशन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें लाइव FPV कैमरा फीड की सुविधा है, जिससे ऑपरेटर को ड्रोन के कैमरे से वास्तविक समय की तस्वीरें और वीडियो मिल सकते हैं।

इसके अलावा दिन और रात दोनों परिस्थितियों में निगरानी के लिए EO/IR सेंसर जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों, संवेदनशील स्थानों और ऐसे इलाकों की निगरानी में मदद मिल सकती है जहां मानव टीम भेजना जोखिम भरा हो।

बचाव अभियान में भी हो चुका इस्तेमाल

‘अलख’ तकनीक का उपयोग केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। IIT कानपुर से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, उत्तराखंड के सिल्क्यारा सुरंग बचाव अभियान के दौरान भी ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल सुरंग के भीतर की स्थिति का आकलन करने के लिए किया गया था।

स्वॉर्म तकनीक पर भी जोर

भविष्य में इस तकनीक को स्वॉर्म ऑपरेशन से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। स्वॉर्म तकनीक में कई ड्रोन एक साथ समन्वय के साथ काम कर सकते हैं। इससे बड़े क्षेत्र की निगरानी और जटिल अभियानों में कम समय में अधिक जानकारी जुटाने में मदद मिल सकती है।

छोटे आकार, GPS के बिना ऑपरेशन की क्षमता, लाइव वीडियो निगरानी और स्वॉर्म तकनीक के संभावित इस्तेमाल के कारण ‘अलख’ भारत में विकसित हो रही नई पीढ़ी की ड्रोन तकनीक का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।