डेस्क : अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि ईरान पर आर्थिक दबाव बनाना वाशिंगटन के पास उपलब्ध सबसे प्रभावी साधन है। हालांकि, उन्होंने इसे एक ‘‘नाजुक संतुलन’’ बताते हुए कहा कि ईरान भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाने की कोशिश कर सकता है। वेंस की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।
सीएनएन के अनुसार, एक रेडियो कार्यक्रम में बातचीत के दौरान वेंस ने कहा कि पिछले कुछ सप्ताह में ईरान पर अमेरिका की तुलना में अधिक आर्थिक दबाव पड़ा है। उन्होंने स्वीकार किया कि तनाव के कारण तेल की कीमतें बढ़ी हैं, लेकिन कहा कि अमेरिकी प्रशासन ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए तेल एवं गैस की आवाजाही सुनिश्चित करने के प्रयास कर रहा है।
वेंस ने कहा कि वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों के लिए ईरान को आर्थिक रूप से दंडित करने से उसके फैसलों पर असर पड़ेगा। उनका कहना था कि लगातार आर्थिक दबाव तेहरान को यह सोचने के लिए मजबूर करेगा कि वह अमेरिका के साथ किस तरह का समझौता करना चाहता है।
परमाणु क्षमता दोबारा विकसित नहीं करने देना लक्ष्य
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा कि वाशिंगटन की व्यापक रणनीति का उद्देश्य ईरान को अपनी परमाणु क्षमताओं को दोबारा विकसित करने से रोकना है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ऐसी स्थिति बनाना चाहता है, जहां न केवल यह स्पष्ट हो कि ईरान की परमाणु सुविधाएं नष्ट हो चुकी हैं, बल्कि यह भरोसा भी हो कि तेहरान भविष्य में उन्हें दोबारा बनाने का प्रयास नहीं करेगा।
वेंस का बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ नए और कड़े आर्थिक कदमों की घोषणा के बाद आया है। ट्रंप ने इसे ईरान के खिलाफ अब तक का ‘‘सबसे बड़ा आर्थिक अभियान’’ बताते हुए कहा है कि इसका उद्देश्य तेहरान की आर्थिक जीवनरेखा को कमजोर करना है।
ट्रंप ने तेल तस्करी नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन, मुद्रा विनिमय केंद्रों, जहाज पंजीकरण और ईरान से जुड़ी मुखौटा कंपनियों पर कार्रवाई की चेतावनी दी है। उन्होंने यह भी कहा कि जो देश या संस्थाएं ईरान को आर्थिक, कारोबारी या सरकारी स्तर पर मदद करेंगी, उन्हें गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
ईरान ने प्रतिबंधों को बताया ‘आर्थिक आतंकवाद’
अमेरिकी कार्रवाई पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने नए अमेरिकी प्रतिबंधों को ‘‘आर्थिक आतंकवाद’’ और ‘‘मानवता के खिलाफ अपराध’’ करार दिया है। मंत्रालय ने कहा कि ये प्रतिबंध अमेरिका की ओर से ईरानी जनता के खिलाफ दशकों से जारी शत्रुतापूर्ण नीति का एक और उदाहरण हैं।
ईरान ने कहा कि आर्थिक प्रतिबंध और दबाव सैन्य आक्रमण तथा युद्ध का ही दूसरा रूप हैं। तेहरान ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी आर्थिक, राजनीतिक और सैन्य दबाव के बावजूद वह अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने ट्रंप के ‘‘इकोनॉमिक डी-डे’’ अभियान की आलोचना करते हुए कहा कि यह अमेरिका की अपनी आर्थिक समस्याओं से ध्यान भटकाने की कोशिश है। उन्होंने दावा किया कि असफल नीतियों को और आगे बढ़ाने से अमेरिका को फिर नुकसान उठाना पड़ेगा और ईरान में उसके प्रति नाराजगी बढ़ेगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी विवाद का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
ट्रंप ने दावा किया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिलहाल खुला है और कई जहाज वहां से गुजर रहे हैं। उन्होंने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को प्रभावी बताते हुए कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
वहीं, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा है कि अमेरिका द्वारा अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी किए जाने तक तेहरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलने पर विचार नहीं करेगा। उन्होंने अमेरिका से नाकेबंदी हटाने, ईरान की जब्त संपत्तियां जारी करने और तेल प्रतिबंधों में राहत देने जैसी मांगें रखी हैं।
इस तरह, आर्थिक प्रतिबंधों, तेल आपूर्ति और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव अब आर्थिक दबाव से आगे बढ़कर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय बनता जा रहा है।








