डेस्क : महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य किए जाने के बाद अब इसकी परीक्षा शुरू हो गई है। परीक्षा के पहले ही दिन 1200 से ज्यादा ऑटो-रिक्शा चालक मराठी के सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। चालकों से रोजमर्रा की बातचीत से जुड़े कुल 16 सवाल पूछे जा रहे हैं।
16 सवालों से परखी जा रही मराठी
क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय के अधिकारी चालकों से मराठी के 16 सवाल पूछ रहे हैं। इन सवालों का उद्देश्य यह जांचना है कि चालक यात्रियों के साथ सामान्य बातचीत मराठी में कर सकता है या नहीं।
चालकों से यात्री की मंजिल पूछने, रास्ता और दिशा समझने, किराया बताने, मीटर शुरू करने और वाहन से जुड़ी सामान्य बातों के बारे में सवाल किए जा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर उनसे यह भी पूछा जा रहा है कि मराठी में कैसे कहेंगे—‘मीटर चालू कर दिया है’ या ‘मुझे सीएनजी भरवानी है।’
जवाब नहीं दे पाए तो एक महीने का समय
जो चालक परीक्षा में संतोषजनक प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें मराठी सीखने के लिए एक महीने का नोटिस दिया जा रहा है। इसके बाद दोबारा जांच होगी।
अगर दूसरी बार भी चालक मराठी का आवश्यक व्यावहारिक ज्ञान साबित नहीं कर पाता है, तो उसके बैज को तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है। इसके बाद भी नियम का पालन नहीं करने पर आगे की कार्रवाई का प्रावधान है।
पहले ही 1.65 लाख चालकों को दिया प्रशिक्षण
महाराष्ट्र सरकार ने चालकों को मराठी सिखाने के लिए 105 दिन का प्रशिक्षण अभियान चलाया था। परिवहन विभाग के अनुसार, इस अभियान में करीब 1.65 लाख चालकों को प्रशिक्षण देकर प्रमाणपत्र दिए जा चुके हैं।
अब आरटीओ की ओर से यह जांच की जा रही है कि चालक वास्तव में रोजमर्रा की परिस्थितियों में मराठी समझने और बोलने में सक्षम हैं या नहीं।
नियम को लेकर यूनियन ने उठाए सवाल
मराठी भाषा की परीक्षा को लेकर ऑटो और टैक्सी चालक संगठनों ने भी सवाल उठाए हैं। यूनियन नेताओं का कहना है कि नियमों में ‘मराठी का कार्यसाधक ज्ञान’ तो अनिवार्य किया गया है, लेकिन इसकी स्पष्ट परिभाषा और मूल्यांकन का निश्चित मानक तय नहीं है।
चालक संगठनों ने यह भी आशंका जताई है कि जांच की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होने पर भ्रष्टाचार और आर्थिक शोषण की संभावना बढ़ सकती है।
12 अगस्त से लागू हुआ संशोधित नियम
महाराष्ट्र सरकार ने ‘महाराष्ट्र मोटर वाहन नियम, 1989’ में संशोधन कर व्यावसायिक यात्री वाहन चालकों के लिए मराठी का कार्यसाधक ज्ञान अनिवार्य किया है। यह नियम ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ऐप आधारित कैब चालकों पर भी लागू है।
सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य किसी चालक की आजीविका छीनना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि महाराष्ट्र में यात्रियों से रोजमर्रा की बातचीत करने वाले चालक स्थानीय भाषा का व्यावहारिक ज्ञान रखते हों।








