इंस्पेक्टर हत्याकांड में बड़ा फैसला, दोषी की फांसी 25 साल की सजा में बदली

0

डेस्क : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस इंस्पेक्टर की हत्या के दोषी पप्पू उर्फ चंद्र कुमार की फांसी की सजा को बदलकर 25 साल की सश्रम आजीवन कारावास में तब्दील कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोषी को इस अवधि में किसी भी प्रकार की छूट या माफी का लाभ नहीं मिलेगा।

न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए हत्या की दोषसिद्धि को बरकरार रखा, लेकिन मृत्युदंड को उचित नहीं माना।

पुलिस टीम पर की थी फायरिंग

मामला वर्ष 2014 का है। फर्रुखाबाद के कोतवाली क्षेत्र में एक आपराधिक मामले में वांछित आरोपी को गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस टीम पर पप्पू उर्फ चंद्र कुमार ने देसी तमंचे से गोली चला दी थी। गोली पुलिस इंस्पेक्टर राज कुमार सिंह के सीने में लगी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

घटना के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। फर्रुखाबाद की सत्र अदालत ने 30 मार्च 2015 को हत्या, आपराधिक धमकी और शस्त्र अधिनियम से संबंधित धाराओं में उसे दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई थी।

सुधार की संभावना को माना महत्वपूर्ण

हाईकोर्ट ने सजा पर विचार करते हुए कहा कि मृत्युदंड केवल ‘दुर्लभतम में दुर्लभ’ मामलों में ही दिया जाना चाहिए। अदालत ने दोषी की उम्र, जेल में उसके आचरण और उसके सुधार की संभावनाओं सहित कई परिस्थितियों को ध्यान में रखा।

अदालत के अनुसार दोषी की वर्तमान उम्र करीब 51 वर्ष है और जेल में उसका आचरण संतोषजनक रहा है। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि घटना में एक ही गोली चलाई गई थी और एक ही चोट लगी थी। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने मृत्युदंड को 25 वर्ष की सश्रम कैद में बदलने का निर्णय लिया।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि 25 वर्ष की अवधि पूरी होने से पहले दोषी को किसी प्रकार की रिहाई, छूट या माफी का लाभ नहीं मिलेगा।