वॉशिंगटन : अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाई है। नासा का अत्याधुनिक नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप रविवार को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स के फाल्कन हेवी रॉकेट के जरिए सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया। करीब 4.3 अरब डॉलर की लागत वाला यह मिशन अंतरिक्ष में पृथ्वी से लगभग 16 लाख किलोमीटर दूर स्थित अपने गंतव्य की ओर रवाना हो चुका है।
रोमन स्पेस टेलीस्कोप का मुख्य उद्देश्य दूसरे तारों के आसपास मौजूद ग्रहों की खोज करना, डार्क एनर्जी और डार्क मैटर जैसे ब्रह्मांड के रहस्यमय पहलुओं का अध्ययन करना तथा अंतरिक्ष का अब तक का सबसे व्यापक सर्वेक्षण करना है। नासा के अनुसार, यह मिशन अरबों आकाशगंगाओं और खरबों तारों के अध्ययन में मदद कर सकता है।
हबल से 100 गुना बड़ा दृश्य क्षेत्र
रोमन टेलीस्कोप की सबसे बड़ी खासियत इसका विशाल दृश्य क्षेत्र है। इसका दृश्य क्षेत्र हबल स्पेस टेलीस्कोप से 100 गुना से भी अधिक बड़ा होगा। इसके चलते वैज्ञानिक एक बार में अंतरिक्ष के कहीं अधिक बड़े हिस्से का अध्ययन कर सकेंगे। नासा के मुताबिक रोमन आकाश का सर्वेक्षण हबल की तुलना में करीब 1,000 गुना तेजी से कर सकेगा।
यह टेलीस्कोप उन ग्रहों की भी खोज करेगा, जो हमारे सौरमंडल के बाहर मौजूद हैं। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इससे हजारों नए एक्सोप्लैनेट का पता चल सकता है और हमारी आकाशगंगा में मौजूद ग्रह प्रणालियों को समझने में नई जानकारी मिलेगी।
जेम्स वेब के साथ मिलकर करेगा काम
रोमन स्पेस टेलीस्कोप अपने अंतिम गंतव्य पर पहुंचने के बाद जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के साथ मिलकर ब्रह्मांड का अध्ययन करेगा। जहां जेम्स वेब दूर अंतरिक्ष की बेहद बारीक और गहरी तस्वीरें लेने में सक्षम है, वहीं रोमन का विशाल दृश्य क्षेत्र वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड का व्यापक नक्शा तैयार करने में मदद करेगा।
वैज्ञानिकों के लिए डार्क एनर्जी का अध्ययन भी इस मिशन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। माना जाता है कि डार्क एनर्जी ब्रह्मांड के लगातार तेजी से फैलने के पीछे प्रमुख भूमिका निभाती है। रोमन के आंकड़ों से वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश करेंगे कि ब्रह्मांड के विस्तार की गति क्यों बढ़ रही है।
तीन महीने से अधिक की यात्रा
लॉन्च के बाद रोमन टेलीस्कोप को अपने अंतिम कक्षीय स्थान तक पहुंचने में करीब तीन महीने लगेंगे। वहां से यह ब्रह्मांड के उन हिस्सों का सर्वेक्षण करेगा, जिन्हें अब तक इतनी व्यापकता से देख पाना संभव नहीं था।
नासा की पहली मुख्य खगोलशास्त्री नैंसी ग्रेस रोमन के नाम पर रखे गए इस टेलीस्कोप को अंतरिक्ष विज्ञान में एक नई पीढ़ी की वेधशाला माना जा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि रोमन की व्यापक पहुंच दुर्लभ और असामान्य खगोलीय घटनाओं की खोज की संभावनाओं को भी काफी बढ़ाएगी।








