लियोनेल मेसी ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल को कहा अलविदा, 21 साल के ऐतिहासिक सफर का अंत

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स्पोर्ट्स डेस्क : फुटबॉल जगत के महानतम खिलाड़ियों में शुमार लियोनेल मेसी ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास की घोषणा कर दी है। 39 वर्षीय मेसी ने सोमवार को सोशल मीडिया के जरिए अर्जेंटीना की राष्ट्रीय टीम से विदाई का ऐलान किया। इसके साथ ही राष्ट्रीय टीम के साथ उनका करीब 21 वर्षों का शानदार सफर समाप्त हो गया।

मेसी ने अपने भावुक संदेश में कहा कि यह फैसला उनके लिए बेहद मुश्किल और दर्दनाक है, लेकिन अब उन्हें लगता है कि सही समय आ गया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अर्जेंटीना की जर्सी के लिए हमेशा अपना सबकुछ दिया और टीम के साथ ऐसे पल जीए, जिनका कभी सपना देखा था।

अर्जेंटीना के सबसे सफल खिलाड़ियों में नाम

मेसी ने अर्जेंटीना के लिए 207 मैचों में 125 गोल किए। वह देश के लिए सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने और सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी हैं। उन्होंने 2005 में अर्जेंटीना की सीनियर टीम के लिए पदार्पण किया था।

मेसी की कप्तानी में अर्जेंटीना ने 2021 और 2024 में कोपा अमेरिका का खिताब जीता। इसके बाद 2022 में कतर में खेले गए विश्व कप में अर्जेंटीना को चैंपियन बनाया। इस जीत के साथ मेसी का लंबे समय से चला आ रहा विश्व कप जीतने का सपना भी पूरा हुआ।

2026 विश्व कप के बाद लिया फैसला

मेसी ने 2026 विश्व कप में भी अर्जेंटीना की कप्तानी की। अर्जेंटीना फाइनल में स्पेन से 1-0 से हार गया। यह मुकाबला राष्ट्रीय टीम के लिए मेसी का आखिरी मैच साबित हुआ। इसके बाद उन्होंने संन्यास का फैसला सार्वजनिक किया।

मेसी ने बताया कि उन्होंने अपना विदाई संदेश विश्व कप फाइनल के दो दिन बाद ही लिख लिया था, लेकिन बाद की परिस्थितियों ने उन्हें अपने फैसले पर और अधिक दृढ़ कर दिया।

पिता के निधन का भी पड़ा असर

मेसी के पिता और लंबे समय तक उनके एजेंट रहे जॉर्ज मेसी का अगस्त में निधन हो गया। इस व्यक्तिगत दुख के बाद मेसी ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लेने के अपने फैसले को और पक्का किया।

क्लब फुटबॉल में जारी रहेगा सफर

अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लेने के बावजूद मेसी का क्लब करियर जारी रहेगा। वह अमेरिका के इंटर मियामी के लिए खेल रहे हैं और उनका मौजूदा करार 2028 MLS सीजन के अंत तक है।

मेसी की विदाई के साथ अर्जेंटीना फुटबॉल का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया है। विश्व कप, कोपा अमेरिका और रिकॉर्ड 125 अंतरराष्ट्रीय गोलों के साथ उन्होंने राष्ट्रीय टीम में ऐसी विरासत छोड़ी है, जिसकी बराबरी करना आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़ी चुनौती होगी।