कीव : विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष का समाधान इस बात से नहीं होगा कि कोई देश रूस से तेल, खनिज या अन्य वस्तुओं की खरीद करता है या नहीं। उन्होंने कहा कि युद्ध का समाधान केवल संवाद, कूटनीति और बातचीत के जरिए ही संभव है।
यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा से कीव में मुलाकात के बाद पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत के लिए 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक ऊर्जा परिस्थितियों को देखते हुए भारत के दृष्टिकोण का भी सम्मान किया जाना चाहिए।
जयशंकर ने कहा कि यूक्रेन का इस मुद्दे पर अपना नजरिया है और भारत उसका सम्मान करता है। इसी तरह भारत के पक्ष को लेकर भी अन्य देशों से सम्मान की अपेक्षा है।
उन्होंने कहा, “यह संघर्ष किसी के तेल, खनिज, धातु या उर्वरक खरीदने या न खरीदने से खत्म नहीं होगा। इसका समाधान संवाद, कूटनीति और बातचीत से ही होगा।”
रूस से तेल खरीद पर अमेरिकी दबाव
जयशंकर की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका में नए प्रतिबंधों से जुड़ी विधायी प्रक्रिया चल रही है।
पिछले महीने अमेरिकी सीनेट ने लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट, 2026 को 86-11 मतों से पारित किया। प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों के आयात पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है।
भारत और चीन रूस से कच्चे तेल के प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं। प्रस्तावित कानून में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, वरिष्ठ राजनीतिक एवं सैन्य अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों, ऊर्जा परियोजनाओं और रूस के युद्ध प्रयासों से जुड़े संस्थानों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का भी प्रावधान है।
भारत-अमेरिका संबंधों पर नवैरो का बयान
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति के सलाहकार पीटर नवैरो ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच “बहुत अच्छे कामकाजी संबंध” हैं और दोनों नेता रूस से तेल खरीद तथा टैरिफ से जुड़े मुद्दों का समाधान कर सकते हैं।
नवैरो ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच उत्पन्न मुद्दों को दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर सुलझाया जाएगा।
व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारत और अमेरिका प्रस्तावित प्रतिबंधों से जुड़ी अमेरिकी विधायी प्रक्रिया पर टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि यह अमेरिका की आंतरिक विधायी प्रक्रिया है।
अग्रवाल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है और दोनों पक्ष नियमित संपर्क में हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देश पहले से सहमत भावना के अनुरूप व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
भारत की ओर से लगातार यह रुख सामने आता रहा है कि ऊर्जा सुरक्षा और अपने नागरिकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए देश अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर ऊर्जा संबंधी फैसले लेगा।








