नई दिल्ली : स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई है। याचिका में उनकी गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताते हुए तत्काल रिहाई की मांग की गई है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने मामले की तत्काल सुनवाई के लिए सहमति जताई है।
भारद्वाज को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन के दौरान एक छात्र कार्यकर्ता के पिता के साथ कथित मारपीट के मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से गिरफ्तार कर दिल्ली लाया गया था। इसके बाद दिल्ली की अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
गिरफ्तारी को बताया गैरकानूनी
भारद्वाज की ओर से दायर याचिका में दावा किया गया है कि उनकी गिरफ्तारी कानून के अनुरूप नहीं हुई और उन्हें हिरासत से रिहा किया जाना चाहिए। उनके वकील उमेश शर्मा ने दिल्ली उच्च न्यायालय में मामले का उल्लेख करते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की। न्यायालय ने मामले को आज सुनवाई के लिए स्वीकार किया है।
जंतर-मंतर मामले में बढ़ी कानूनी कार्रवाई
भारद्वाज पर जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान मारपीट के आरोप हैं। मामले में दिल्ली पुलिस ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून तथा बाल संरक्षण से जुड़े कानून की धाराएं भी जोड़ी हैं। इसके अलावा आपराधिक धमकी से संबंधित प्रावधान भी मामले में शामिल किए गए हैं।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही है। अब दिल्ली उच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर अदालत क्या रुख अपनाती है।








