जयशंकर की उरुग्वे और ब्राजील के विदेश मंत्रियों से मुलाकात, द्विपक्षीय संबंधों पर जोर

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नई दिल्ली : 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की शुरुआत के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को नई दिल्ली में उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-उरुग्वे संबंधों को और मजबूत करने के साथ व्यापार, संपर्क और सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की।

बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि दोनों पक्षों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए एक केंद्रित रोडमैप पर सहमति बनी है। उन्होंने क्षेत्रीय संगठनों कम्युनिटी ऑफ लैटिन अमेरिकन एंड कैरेबियन स्टेट्स (CELAC) और मर्कोसुर (MERCOSUR) के साथ साझेदारी को मजबूत करने में उरुग्वे के समर्थन की भी सराहना की।

जयशंकर ने यह भी बताया कि उरुग्वे ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance) में शामिल होने के लिए अपना अनुसमर्थन दस्तावेज भारत को सौंप दिया है।

भारत और उरुग्वे के बीच संबंधों को और गति देने की दिशा में भारत ने जुलाई में बिनॉय जॉर्ज को उरुग्वे में अपना अगला राजदूत नियुक्त किया था। भारत की ओर से उरुग्वे में दूतावास खोलने के फैसले का भी उरुग्वे के भारत में राजदूत अल्बर्टो एंटोनियो गुआनी अमरिला ने स्वागत किया है। उन्होंने इसे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

अमरिला ने दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि उरुग्वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी के लिए उत्सुक है। उन्होंने यह भी कहा कि उरुग्वे के राष्ट्रपति भारत की यात्रा करना चाहेंगे। उनके मुताबिक, भारत के विकसित अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ने के साथ लैटिन अमेरिका एक मजबूत साझेदार के रूप में उभर रहा है और दोनों क्षेत्रों के बीच विभिन्न उत्पादक क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं।

ब्राजील के विदेश मंत्री से भी मुलाकात

जयशंकर ने शुक्रवार को ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच व्यापार और निवेश, रक्षा, ऊर्जा, कृषि तथा अंतरिक्ष सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।

उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन शुक्रवार को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने नई दिल्ली पहुंचे। हवाई अड्डे पर विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया।

भारत इस वर्ष 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। भारत की अध्यक्षता का विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” है, जिसमें विकास, स्थिरता और नवाचार को प्रमुख प्राथमिकता दी गई है।

ब्रिक्स प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग और समन्वय का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। समूह के एजेंडे में विकास, वित्त, प्रौद्योगिकी, व्यापार और लोगों के बीच संपर्क जैसे मुद्दे शामिल हैं। वर्तमान में ब्रिक्स में 11 देश—ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात—शामिल हैं।