निजी स्कूल शिक्षकों को समान वेतन और पेंशन का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

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नई दिल्ली : देशभर के निजी स्कूलों में काम करने वाले शिक्षकों के लिए समान वेतन, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों से जवाब मांगा है। अदालत के इस कदम से निजी स्कूल शिक्षकों के लिए समान और व्यापक कल्याण व्यवस्था लागू किए जाने की मांग को बल मिला है।

यह याचिका ऑल इंडिया टीचर्स फेडरेशन की राष्ट्रीय समन्वयक लिगिमोल जॉर्ज की ओर से दायर की गई है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी किया है।

करीब 37 लाख शिक्षकों का मुद्दा

याचिका में कहा गया है कि देश में करीब 37 लाख निजी स्कूल शिक्षक हैं, लेकिन बड़ी संख्या में शिक्षकों को पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी सुविधाएं नहीं मिलतीं। कई शिक्षक संविदा, अस्थायी, तदर्थ या निश्चित वेतन पर काम कर रहे हैं और उन्हें पेंशन, चिकित्सा सहायता, बीमा तथा सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले अन्य लाभों का पर्याप्त संरक्षण नहीं है।

याचिकाकर्ता ने कहा है कि निजी स्कूलों में समान काम करने वाले शिक्षकों को अलग-अलग राज्यों और संस्थानों में अलग-अलग तरह की सुविधाएं मिलती हैं। ऐसे में पूरे देश के लिए एक समान कल्याणकारी व्यवस्था की जरूरत है।

राष्ट्रीय कल्याण बोर्ड बनाने की मांग

याचिका में निजी स्कूल शिक्षकों के लिए एक राष्ट्रीय कल्याण बोर्ड गठित करने का सुझाव दिया गया है। इसके तहत शिक्षकों को पेंशन, बीमा, चिकित्सा सुविधा, भविष्य निधि, उपदान और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

अब केंद्र और राज्य सरकारों के जवाब के बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगे की सुनवाई करेगा। अदालत के रुख से निजी स्कूल शिक्षकों की सेवा शर्तों और सामाजिक सुरक्षा को लेकर व्यापक व्यवस्था पर बहस तेज होने की उम्मीद है।