व्रत स्वस्थ समाज की आधारशिला है : मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’

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जयपुर : पर्युषण महापर्व के पांचवें दिन शनिवार को मालवीय नगर स्थित अणुविभा केन्द्र में ‘व्रत चेतना दिवस’ का आयोजन श्रद्धा, तप, संयम और आध्यात्मिक चेतना के वातावरण में हुआ। महाप्रज्ञ सभागार में आयोजित धर्म परिषद में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता की।

धर्म परिषद को संबोधित करते हुए मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने कहा कि व्रत केवल आत्मकल्याण का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के स्वस्थ और संतुलित जीवन की आधारशिला भी है। उन्होंने कहा, “व्रत आत्म नियंत्रण की प्रक्रिया है। प्रकृति में भी नियंत्रण है। सूर्य, चंद्रमा, ग्रह और नक्षत्र अपनी-अपनी मर्यादा में रहते हैं, तभी संसार सुरक्षित और संतुलित है। इसी प्रकार व्रत और मर्यादा स्वस्थ समाज की आधारशिला हैं।”

मुनिश्री ने कहा कि भगवान महावीर ने आत्मविकास के लिए आत्मसंयम और आत्मनियंत्रण का संदेश दिया। धर्म की शुरुआत और धार्मिकता की पहचान केवल ज्ञान से नहीं, बल्कि व्रत, संयम और त्याग से होती है। भोग और उपभोग की सीमाएं निर्धारित करने से व्यक्ति के साथ-साथ परिवार और समाज भी स्वस्थ रहता है।

उन्होंने भगवान महावीर के जीव की पूर्व भवों की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन की यात्रा अनादि है। तप, जप, ध्यान, स्वाध्याय, सेवा और भक्ति जैसे आध्यात्मिक उपक्रम मनुष्य को जीवन की अंतिम मंजिल की ओर ले जाते हैं।

इस अवसर पर मुनिश्री संभव कुमार जी ने कहा कि व्रत धर्म का स्वरूप है। व्रत से आत्मा के साथ जुड़ने वाले कर्मों के बंधन को रोकने में सहायता मिलती है और आत्मशुद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने कहा कि व्रत से आत्मा स्वस्थ होती है और व्यवहार भी विश्वसनीय बनता है। अणुव्रत अच्छाइयों का ऐसा गुलदस्ता है, जिससे व्यक्तित्व महकता और चमकता है। उन्होंने कहा कि जीवन की सार्थकता व्रत और संयम के आचरण में निहित है।

कार्यक्रम में आचार्य श्री तुलसी द्वारा रचित अणुव्रत गीत का संगान किया गया। तेरापंथ महिला मंडल शहर की बहनों ने अणुव्रत चेतना गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में मुनिवृंद द्वारा तीर्थंकर एवं अरिहंत प्रभु की स्तुति की गई। इस दौरान जप, तप, ध्यान, मौन और स्वाध्याय सहित विभिन्न आध्यात्मिक उपक्रम भी आयोजित हुए।

तेरापंथ सभा के अध्यक्ष श्री शांतिलाल जी गोलछा ने पर्युषण महापर्व की शुभकामनाएं देते हुए आवश्यक जानकारियां प्रदान कीं। शासन सेवी डॉ. नरेश जी मेहता ने तपस्वी श्री प्रदीप जी डोसी के तप की अनुमोदना की। इस अवसर पर अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने बेले, तेले, चौले और पचोले तप का प्रत्याख्यान किया।

राजस्थान सरकार के पूर्व मंत्री श्री के. सी. बिश्नोई ने भी अणुविभा केन्द्र पहुंचकर मुनिश्री के दर्शन किए तथा आध्यात्मिक मार्गदर्शन और आशीर्वाद प्राप्त किया।

तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम की मंत्री श्रीमती नेहा जी दूगड़ ने संस्था की गतिविधियों एवं आगामी उपक्रमों की जानकारी प्रदान की। पूरे आयोजन में पर्युषण महापर्व की आध्यात्मिक भावना, आत्मसंयम और व्रत चेतना का विशेष संदेश देखने को मिला।