14 साल की किशोरी से जुड़े मामले में हाई कोर्ट का अहम फैसला, आरोपी की सजा में दी राहत

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नई दिल्ली : दिल्ली हाई कोर्ट ने वर्ष 2009 से जुड़े एक दुष्कर्म मामले में दोषी को सजा में राहत दी है। अदालत ने मामले की परिस्थितियों, आरोपी और पीड़िता के पुराने संबंधों तथा उनके बाद के वैवाहिक जीवन को ध्यान में रखते हुए आरोपी को दोबारा जेल भेजना उचित नहीं माना।

मामले के अनुसार, घटना के समय पीड़िता करीब 14 वर्ष की थी, जबकि आरोपी की उम्र लगभग 18 वर्ष थी। पीड़िता घर से लापता होने के बाद आरोपी के साथ दिल्ली और मनाली गई थी। आरोपी का कहना था कि दोनों के बीच पहले से संबंध थे और वह अपनी इच्छा से उसके साथ गई थी।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य भी आया कि पीड़िता के सीने पर आरोपी के नाम का टैटू बना हुआ था। दोनों ने बाद में विवाह कर लिया और अपने जीवन में आगे बढ़ गए। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि आरोपी का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था।

अदालत ने कहा कि घटना को कई वर्ष बीत चुके हैं और आरोपी अब करीब 35 वर्ष का है। वह पहले ही लगभग दो वर्ष चार महीने जेल में रह चुका है। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने पहले बिताई गई जेल अवधि को ही सजा के रूप में स्वीकार किया और उसे दोबारा जेल भेजने से राहत दी।

किशोर प्रेम संबंधों पर भी टिप्पणी

फैसले के दौरान हाई कोर्ट ने किशोरावस्था में बनने वाले प्रेम संबंधों से जुड़े मामलों पर भी टिप्पणी की। अदालत ने रोमियो और जूलियट का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे मामलों से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर संसद को विचार करना चाहिए।

अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले का फैसला उसकी विशेष परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है। पीड़िता अब इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहती थी और दोनों अपने वैवाहिक जीवन में आगे बढ़ चुके हैं। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए दोषी को सजा में राहत दी गई।