दिवाली पर पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंथन, तय समय में आतिशबाजी के विकल्प पर विचार

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नई दिल्ली :  दिवाली पर दिल्ली-एनसीआर में पटाखों के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अहम टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने से लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं, वहीं पूरे दिन आतिशबाजी की अनुमति देने से बुजुर्गों, बीमार लोगों, बच्चों और अन्य लोगों को परेशानी हो सकती है। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है।

न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ ने कहा कि अदालत न तो पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के पक्ष में है और न ही 24 घंटे पटाखे चलाने की अनुमति दी जा सकती है। अदालत ने पटाखे चलाने के लिए एक निश्चित समय निर्धारित करने के विकल्प पर विचार किया।

ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल पर भी चर्चा

सुनवाई के दौरान पटाखों के इस्तेमाल को लेकर विभिन्न विकल्पों पर चर्चा हुई। केंद्र की ओर से अदालत में एक नोट पेश किया गया, जिसमें सीएसआईआर-नीरी की सलाह के आधार पर नई पीढ़ी के ग्रीन क्रैकर्स के सीमित और निर्धारित शर्तों के साथ इस्तेमाल की संभावना बताई गई।

अदालत के समक्ष रखे गए प्रस्ताव के अनुसार, केवल लाइसेंस प्राप्त निर्माताओं द्वारा बनाए गए और निर्धारित उत्सर्जन तथा ध्वनि मानकों का पालन करने वाले पटाखों को ही अनुमति देने पर विचार किया जा सकता है। इसके साथ ही प्रतिबंधित रसायनों के इस्तेमाल पर रोक जारी रखने की बात कही गई।

15 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों में बेरियम के इस्तेमाल से जुड़े मुद्दे पर 15 अक्टूबर को सुनवाई करने की बात कही है। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए पटाखों के इस्तेमाल को लेकर अदालत के सामने कई पहलुओं पर विचार किया जा रहा है।

दिवाली के दौरान दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता को लेकर हर साल चिंता सामने आती है। ऐसे में अदालत के समक्ष धार्मिक भावनाओं, पर्यावरण और प्रदूषण से जुड़े मुद्दों के बीच संतुलन कायम करने का विषय महत्वपूर्ण है।