मुंबई : भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने बुधवार को रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया। आरबीआई ने इसे 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया है। इसके साथ ही होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज की ईएमआई भर रहे लोगों को फिलहाल ब्याज दरों में कमी की राहत नहीं मिलेगी।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति के फैसले की घोषणा की। वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितता और महंगाई के जोखिम को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में बदलाव नहीं करने का फैसला किया।
ईएमआई पर क्या होगा असर
रेपो रेट में बदलाव नहीं होने का सीधा असर कर्ज की ब्याज दरों पर पड़ता है। खासकर फ्लोटिंग रेट वाले होम और अन्य ऋणों की ईएमआई में फिलहाल कमी की संभावना नहीं है। कर्जदारों को अब अगली मौद्रिक नीति समीक्षा का इंतजार करना होगा।
महंगाई को लेकर आरबीआई सतर्क
आरबीआई ने महंगाई को लेकर भी सावधानी बरतने के संकेत दिए हैं। गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, तेल और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण आने वाले समय में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई का अनुमान 5.1 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है।
अनुमान के मुताबिक दूसरी तिमाही में महंगाई 4.7 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 5.9 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.5 प्रतिशत रह सकती है।
जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाया
आरबीआई ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक रुख भी दिखाया है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2027 के लिए देश की जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। आरबीआई के अनुसार मजबूत घरेलू मांग आर्थिक विकास को सहारा दे रही है।
वैश्विक संकट पर भी नजर
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, प्रमुख व्यापार मार्गों में व्यवधान और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव को देखते हुए आरबीआई ने सतर्क रुख अपनाया है। केंद्रीय बैंक का कहना है कि बाहरी जोखिमों के बीच विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
रेपो रेट को स्थिर रखने के फैसले से फिलहाल कर्जदारों को नई राहत नहीं मिली है, हालांकि आने वाले महीनों में महंगाई और आर्थिक विकास की स्थिति के आधार पर आरबीआई के अगले कदम पर बाजार की नजर रहेगी।








