जयपुर : अजमेर रोड स्थित टैगोर नगर के नवोदित अणुव्रत भवन में बुधवार को ‘आत्मविश्वास’ विषय पर एक प्रेरक प्रवचन कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस अवसर पर आचार्य महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री तत्त्व रुचि ‘तरुण’ ने अपने उद्बोधन में आत्मविश्वास को जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति बताते हुए कहा कि आत्मविश्वास के बल पर असंभव प्रतीत होने वाले कार्य भी संभव हो जाते हैं।
मुनि श्री ने कहा कि आत्मविश्वास केवल मानसिक शक्ति नहीं, बल्कि एक गहन आत्मिक गुण है। यह मनुष्य को कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी स्थिर बनाए रखता है और उसे भय से मुक्त कर लक्ष्य की ओर अग्रसर करता है। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वासी व्यक्ति प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अनुकूलता खोज लेता है और जीवन के संघर्षों में विचलित नहीं होता। ऐसे व्यक्ति के लिए बाधाएँ भी सफलता की सीढ़ी बन जाती हैं।
उन्होंने आगे कहा कि जीवन में रिद्धि-सिद्धि जैसी उपलब्धियाँ भी आत्मविश्वास के माध्यम से ही प्राप्त होती हैं। आत्मविश्वास व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाता है और उसे शीघ्र अपने लक्ष्य की प्राप्ति की ओर ले जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि आत्मविश्वास वह आधार है जिस पर सफलता की मजबूत इमारत खड़ी होती है।
इस अवसर पर मुनि श्री संभव कुमार जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आत्मविश्वास को जागृत करने में प्रोत्साहन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि व्यक्ति को उत्साहवर्धक वाणी और सकारात्मक वातावरण मिले, तो उसका आत्मविश्वास स्वतः ही बढ़ता है। उन्होंने कहा कि महापुरुषों ने सदैव आत्मप्रकाश और आत्मविश्वास के बल पर ही महान उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं। वास्तव में अटूट आत्मविश्वास ही सफलता का महामंत्र है।
कार्यक्रम की शुरुआत तीर्थंकर सुपार्श्वनाथ की स्तुति से हुई। इसके पश्चात प्रेरक मुक्तक काव्य की प्रस्तुति ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। अंत में सभा का समापन शांतिपूर्ण और प्रेरणादायी वातावरण में हुआ।


