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नई दिल्ली। लालकिला कार धमाका मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बड़ा खुलासा किया है। अलकायदा के आतंकवादी ने इस साजिश के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का भी इस्तेमाल किया था। एनआईए के सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने रॉकेट इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस भी बनाए थे। जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के काजीगुंड के जंगल में उनका टेस्ट किया गया। यह चौंकाने वाला खुलासा एनआईए द्वारा 14 मई को दायर आरोपपत्र में किया गया है।
आरोप पत्र के अनुसार, आरोपियों ने आईईडी बनाने और इसके इस्तेमाल के लिए लैब जैसी बारीकी और सफाई का इस्तेमाल किया था। आरोपपत्र में नामजद आरोपी अंसार, गजवत-उल-हिंद आतंकी मॉड्यूल का इंजीनियर निकला, जो अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (एक्यूआईएस) से जुड़ा था। गृह मंत्रालय एक्यूआईएस और इसके सभी समूहों को आतंकी संगठन घोषित कर चुका है।
धमाके में शामिल थे तीन डॉक्टर
आरोपपत्र में कहा गया है कि आरोपी जसीर बिलाल वानी वर्ष 2024-25 में फरीदाबाद में अल फलाह यूनिवर्सिटी कैंपस में दो से तीन बार रुका, ताकि साजिश के लिए तकनीकी मदद दे सके। जांच में पता चला कि वहां काम करने वाले तीन डॉक्टर कथित तौर पर धमाके में शामिल थे। इस जानकारी के बाद विश्वविद्यालय की भूमिका जांच के दायरे में आ गई। जसीर को डॉ. अदील अहमद राथर ने डॉ. उमर उन नबी से मिलवाया था। नबी ही मुख्य आरोपी था।
खुलासा: यूट्यूब से सीखा बम बनाना
लाल किले के पास 10 नवंबर, 2025 को हुए कार धमाका मामले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। आरोपपत्र के अनुसार, आरोपी जसीर ने यूट्यूब और एआई आधारित प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रॉकेट आईईडी बनाने और विस्फोटक मिश्रण के अनुपात की जानकारी जुटाई थी। जांच में सामने आया कि अदील ने उसे आईईडी बनाने के लिए जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई, जबकि डॉ. उमर ने इम्प्रोवाइज्ड रॉकेट आईईडी तैयार करने के तरीके बताए।
आरोपपत्र के अनुसार, आरोपी कश्मीर और देश के अन्य हिस्सों में सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर ड्रोन के जरिए विस्फोटक हमला करने की योजना बना रहे थे। उन्होंने सिलेंडर आधारित आईईडी का भी परीक्षण किया था। जांच में पता चला कि जसीर ने फ्लिपकार्ट के जरिए सेंसर, आरएफ ट्रांसमीटर, सोल्डरिंग किट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान मंगवाए थे। इनका इस्तेमाल आईईडी ट्रिगर तैयार करने में किया गया। खर्च डॉ. उमर ने उठाया था। एनआईए ने आरोपपत्र में कहा कि इस मामले ने चिकित्सा पेशे से जुड़े कथित ‘व्हाइट कॉलर मॉड्यूल’ का खुलासा किया है। जांच में टीएटीपी विस्फोटक के इस्तेमाल की भी पुष्टि हुई है।
जंगलों में किए गए आईईडी परीक्षण
एनआईए के मुताबिक, आरोपियों ने काजीगुंड-अनंतनाग के जंगलों में आईईडी और रॉकेट आधारित विस्फोटकों का परीक्षण किया था। जसीर के खुलासे के बाद जांच एजेंसी ने जंगलों से डिवाइस के अवशेष बरामद किए, जिन्हें साक्ष्य के रूप में जब्त किया है। जांच में यह भी सामने आया कि डॉ. उमर ने जसीर को दो ड्रोन दिए थे, जिनकी उड़ान सीमा और भार क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे।
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