नई दिल्ली : दुनिया में तेजी से बढ़ते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई (AI) के प्रभाव को देखते हुए ब्रिक्स (BRICS) देशों ने इसके इस्तेमाल और विकास के लिए साझा नियम तैयार करने की पहल शुरू कर दी है। भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स सदस्य देश एआई तकनीक के लिए एक समान मानक और नियामकीय ढांचा विकसित करने पर काम करेंगे।
इस पहल का उद्देश्य एआई के सुरक्षित, पारदर्शी और जिम्मेदार उपयोग को सुनिश्चित करना है। ब्रिक्स देशों का मानना है कि एआई तकनीक भविष्य की अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली है, इसलिए इसके लिए स्पष्ट नियम और दिशा-निर्देश जरूरी हैं।
भारत की अगुवाई में हुई बैठकों में एआई मानकीकरण (AI Standardization), डेटा सुरक्षा, तकनीकी गुणवत्ता, साइबर सुरक्षा और एआई के नैतिक इस्तेमाल जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। सदस्य देशों ने इस बात पर जोर दिया कि एआई का विकास मानव हितों और सामाजिक जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रिक्स देशों के बीच एआई को लेकर साझा नियम बनने से तकनीकी सहयोग बढ़ेगा और विकासशील देशों को नई तकनीकों का लाभ उठाने में मदद मिलेगी। इससे वैश्विक स्तर पर एआई के लिए संतुलित और समावेशी नीतियां तैयार करने में भी सहायता मिल सकती है।
भारत का प्रयास है कि ब्रिक्स (BRICS) मंच के माध्यम से एआई के क्षेत्र में विकासशील देशों की भागीदारी को मजबूत किया जाए। साझा नियमों के जरिए नवाचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ एआई से जुड़े जोखिमों को नियंत्रित करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
माना जा रहा है कि ब्रिक्स देशों की यह पहल आने वाले समय में वैश्विक एआई नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है और तकनीकी क्षेत्र में सहयोग का नया रास्ता खोल सकती है।









