दिवाली से पहले दिल्ली में प्रदूषण का बड़ा हमला, हवा बेहद खराब; प्रशासन ने बढ़ाई सख्ती

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डेस्क : दिवाली से पहले वायु प्रदूषण ने एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा दी है। राजधानी की हवा लगातार खराब होती जा रही है। सोमवार सुबह कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 350 के करीब पहुंच गया। अक्षरधाम और ITO में AQI 349 दर्ज किया गया, जबकि इंडिया गेट और जनपथ के आसपास यह 335 रहा। प्रदूषण का स्तर बढ़ने से राजधानी के कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से मौसम में बदलाव और बारिश के कारण प्रदूषण से राहत मिली थी। शनिवार को राजधानी का औसत AQI 117 दर्ज किया गया था। हालांकि, रविवार को प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा और AQI 261 पर पहुंच गया। रविवार शाम तक यह 272 दर्ज किया गया। इसके बाद सोमवार सुबह कई इलाकों में स्थिति और बिगड़ गई।

राजधानी के रोहिणी इलाके में सबसे अधिक 396 AQI दर्ज किया गया। इसके अलावा अलीपुर में 375, विवेक विहार में 370, नरेला में 363, चांदनी चौक में 358 और जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 343 AQI रिकॉर्ड किया गया। वहीं, बुराड़ी में 308, आया नगर में 276, IGI एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 पर 263 और आनंद विहार में 242 AQI रहा।

प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए तेज हुई कार्रवाई

बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली में प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा के मुताबिक, 1 नवंबर को प्रवर्तन टीमों ने 14,930 वाहनों की जांच की। इस दौरान प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) से जुड़े नियमों के उल्लंघन पर 566 चालान किए गए। इसके अलावा निर्माण स्थलों पर भी 300 जगहों का निरीक्षण किया गया।

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने भी प्रदूषण नियंत्रण के लिए अभियान चलाया। पुलिस के अनुसार, 1 नवंबर को 7,279 वाहनों की जांच की गई। इनमें से 714 वाहनों को वापस लौटाया गया, जबकि 38 वाहनों को जब्त किया गया।

स्वास्थ्य के लिए बढ़ सकती है परेशानी

विशेषज्ञों के अनुसार, AQI का स्तर 301 से 400 के बीच होने पर हवा बेहद खराब श्रेणी में आती है। इस स्थिति में लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से सांस संबंधी परेशानी हो सकती है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

दिवाली से पहले राजधानी में प्रदूषण का स्तर बढ़ना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में मौसम का रुख और प्रदूषण नियंत्रण के उपाय दिल्ली की हवा को कितनी राहत दे पाते हैं।