डेस्क : ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। आधुनिक युद्ध में ड्रोन की बढ़ती भूमिका को देखते हुए पाकिस्तान ने अमेरिकी ड्रोन निर्माता कंपनी पावरस के साथ एक समझौता किया है। कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक, समझौते के तहत पाकिस्तान को ड्रोन से संबंधित शुरुआती ऑर्डर भी दिया गया है। हालांकि, इस ऑर्डर की संख्या और उसकी वित्तीय कीमत का खुलासा नहीं किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, पावरस के प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच ड्रोन तकनीक, रक्षा सहयोग और भविष्य में तकनीकी साझेदारी को लेकर चर्चा हुई। पाकिस्तान की ओर से बैठक की पुष्टि की गई है, लेकिन समझौते और शुरुआती ऑर्डर से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।
बताया जा रहा है कि पाकिस्तान की दिलचस्पी केवल अमेरिकी ड्रोन खरीदने तक सीमित नहीं है। वह भविष्य में तकनीक हस्तांतरण और पाकिस्तान में ड्रोन के विकास एवं निर्माण के लिए संयुक्त सहयोग की संभावनाएं भी तलाश रहा है। इससे पाकिस्तान अपनी ड्रोन क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ रक्षा तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की कोशिश कर सकता है।
पाकिस्तान लंबे समय से सैन्य तकनीक के लिए चीन और तुर्किये पर निर्भर रहा है। ऐसे में अमेरिकी कंपनी के साथ नया सहयोग उसके रक्षा तकनीक के स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच आधुनिक ड्रोन और अन्य तकनीकों की भूमिका भी चर्चा में रही है।
इस समझौते को लेकर एक अन्य वजह से भी चर्चा हो रही है। पावरस का प्रस्तावित विलय ऑरियस ग्रीनवे होल्डिंग्स के साथ होना है। इस कंपनी से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप के निवेश जुड़े होने की बात सामने आई है। हालांकि, ट्रंप परिवार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि दोनों भाइयों की पावरस के संचालन अथवा पाकिस्तान के साथ समझौते की बातचीत में प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है। डोनाल्ड ट्रंप जूनियर के प्रवक्ता के अनुसार, उन्हें इस समझौते की पहले से जानकारी नहीं थी।
अमेरिका और पाकिस्तान के बीच हाल के समय में रक्षा और आर्थिक स्तर पर संपर्क बढ़ने के बीच यह समझौता सामने आया है। ऐसे में पाकिस्तान की ड्रोन तकनीक को लेकर अमेरिकी कंपनियों के साथ बढ़ती बातचीत दोनों देशों के बदलते संबंधों का एक महत्वपूर्ण पहलू मानी जा रही है।








