नई दिल्ली: पटना हाईकोर्ट के एक फैसले में महिला की सलवार उतारने की कोशिश और उसके सीने को दबाने की घटना को दुष्कर्म के प्रयास के लिए पर्याप्त नहीं मानने संबंधी टिप्पणियों पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले में की गई कुछ टिप्पणियों को आपत्तिजनक बताया है।
मामला वर्ष 2008 में बिहार के बांका जिले का है। अभियोजन के अनुसार, आरोपी ने एक महिला को फोटो स्टूडियो में बुलाया और उसके पिता को किसी बहाने से बाहर भेजने के बाद दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। आरोप है कि आरोपी ने महिला की सलवार उतारने की कोशिश की और उसके सीने को दबाया। महिला के शोर मचाने पर उसके पिता ने दरवाजा खुलवाया।
इस मामले में निचली अदालत ने आरोपी को दुष्कर्म के प्रयास और अन्य धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद आरोपी ने पटना हाईकोर्ट में अपील की।
पटना हाईकोर्ट ने जुलाई 2026 में मामले की सुनवाई करते हुए दुष्कर्म के प्रयास से संबंधित दोषसिद्धि को रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट का कहना था कि उपलब्ध साक्ष्यों से आरोपी की ओर से दुष्कर्म करने की स्पष्ट मंशा साबित नहीं होती। हालांकि, अदालत ने महिला की गरिमा भंग करने से संबंधित अपराध के तहत कार्रवाई को बरकरार रखा था।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले में की गई कुछ टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए मामले का स्वत: संज्ञान लिया। पीठ ने आरोपी को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से पहले आरोपी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के महाधिवक्ता को निर्देश दिया है कि स्थानीय पुलिस के माध्यम से आरोपी तक नोटिस पहुंचाया जाए। मामले की आगे की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट की टिप्पणियों और फैसले के संबंधित पहलुओं पर विचार करेगा।








