एच-1बी वीज़ा धारकों पर संकट, छंटनी के बाद अमेरिका छोड़ने की नौबत


वॉशिंगटन : अमेरिका की प्रमुख टेक कंपनियों में जारी बड़े पैमाने की छंटनी ने एच-1बी वीज़ा पर कार्यरत भारतीय पेशेवरों की चिंता बढ़ा दी है। Meta, Amazon और अन्य प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा कर्मचारियों की संख्या घटाए जाने के बाद हजारों भारतीय अब अमेरिका में अपने भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं।

अमेरिकी इमिग्रेशन नियमों के तहत एच-1बी वीज़ा धारक कर्मचारी की नौकरी समाप्त होने पर उसे केवल 60 दिनों की अवधि मिलती है, जिसके भीतर नई नौकरी और नया वीज़ा प्रायोजक खोजना अनिवार्य होता है। ऐसा न होने पर संबंधित व्यक्ति को अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के महीनों में टेक उद्योग में लागत कम करने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित पुनर्गठन के चलते बड़े स्तर पर कर्मचारियों की छंटनी की गई है। इसका सबसे अधिक प्रभाव भारतीय पेशेवरों पर पड़ा है, क्योंकि अमेरिकी टेक उद्योग में एच-1बी वीज़ा धारकों में भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा है।

नौकरी गंवाने वाले कई भारतीय परिवार आर्थिक और मानसिक दबाव का सामना कर रहे हैं। वर्षों से अमेरिका में रह रहे इन पेशेवरों के सामने अब गृह ऋण, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य बीमा और ग्रीन कार्ड की लंबी प्रतीक्षा जैसी समस्याएं खड़ी हो गई हैं। कई लोगों ने सामाजिक मंचों पर अपनी स्थिति साझा करते हुए इसे “पूरी जिंदगी के अनिश्चित हो जाने” जैसी परिस्थिति बताया है।

इमिग्रेशन विशेषज्ञों का कहना है कि बड़ी संख्या में प्रभावित कर्मचारी अब अस्थायी राहत पाने के लिए बी-2 विजिटर वीज़ा में परिवर्तन का प्रयास कर रहे हैं, ताकि उन्हें नई नौकरी खोजने के लिए अतिरिक्त समय मिल सके। हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने ऐसे मामलों में दस्तावेजों की जांच और कड़ाई बढ़ा दी है।

उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक एक लाख से अधिक टेक कर्मचारियों की नौकरियां जा चुकी हैं। बदलते हालात के बीच अब कई भारतीय पेशेवर कनाडा और यूरोप जैसे देशों में अवसर तलाशने पर भी विचार कर रहे हैं।

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