क्वेटा : बलोच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) के हिरासत में बंद प्रमुख नेताओं का विरोध प्रदर्शन क्वेटा की हुडा जेल में लगातार छठे दिन भी जारी है। ये नेता न्यायिक प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं और ‘फेसलेस ट्रायल’ प्रणाली के खिलाफ जेल के भीतर ही धरना दे रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, यह विरोध उस निर्णय के खिलाफ है जिसके तहत अदालत की सुनवाई को खुले न्यायालय के बजाय वीडियो लिंक आधारित ‘फेसलेस’ प्रणाली के माध्यम से चलाया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था पारदर्शिता और निष्पक्ष न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
प्रदर्शन में शामिल प्रमुख नेताओं में बीवाईसी की मुख्य आयोजक माहिरंग बलोच, बीबो बलोच, गुलज़ादी सहित कई अन्य शामिल हैं, जो मार्च 2025 से हिरासत में हैं। इन सभी ने इस नई सुनवाई प्रणाली को अस्वीकार करते हुए कहा है कि खुली अदालत में सुनवाई हर आरोपी का मौलिक और कानूनी अधिकार है।
माहिरंग बलोच की बहन द्वारा जारी एक वीडियो बयान में आरोप लगाया गया है कि बलोचिस्तान के अभियोजक जनरल ने अदालत की कार्यवाही में हस्तक्षेप किया और पीठासीन न्यायाधीश पर दबाव डाला। उनका दावा है कि यह हस्तक्षेप गृह विभाग की ओर से किया गया। इसके बाद कथित रूप से अदालत ने कार्यवाही को बदलकर दैनिक ‘फेसलेस’ सुनवाई प्रणाली में बदल दिया।
नई व्यवस्था के तहत न्यायाधीश, अभियोजक, गवाह, बचाव पक्ष के वकील और आरोपी अलग-अलग स्थानों से वीडियो लिंक के जरिए जुड़े रहते हैं। परिजनों और कानूनी प्रतिनिधियों ने चिंता जताई है कि इस प्रक्रिया में गवाहों की पहचान और स्थान की पुष्टि संभव नहीं हो पा रही है, जिससे न्यायिक पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
परिवारों ने यह भी आरोप लगाया है कि कैदियों से मिलने पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। माहिरंग की बहन ने चेतावनी दी है कि यदि हिरासत में बंद नेताओं तक पहुंच जारी नहीं दी गई, तो परिजन और समर्थक सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
इसी बीच, जेल के भीतर चल रहे इस विरोध के समर्थन में तीन दिवसीय ऑनलाइन अभियान भी चलाया गया, जिसमें राजनीतिक कार्यकर्ता, छात्र, वकील, मानवाधिकार कार्यकर्ता और नागरिक समाज के लोग शामिल हुए। अभियान में खुले न्यायालय की अनुपस्थिति, सीमित कानूनी पहुंच और परिवार से मिलने पर प्रतिबंध जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।


