[ad_1]
डेस्क : पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को पुनर्जीवित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। प्रांतीय सरकार ने लाहौर के कई पुराने इलाकों, चौकों और सड़कों के नाम दोबारा बहाल करने की योजना को मंजूरी दी है। इस फैसले के तहत इस्लामपुरा का नाम फिर से “कृष्ण नगर” और मुस्तफाबाद का नाम “धर्मपुरा” किए जाने की तैयारी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पंजाब कैबिनेट की हालिया बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। बैठक की अध्यक्षता मरियम नवाज़ ने की। सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य विभाजन से पहले के लाहौर की ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित करना है।
योजना के तहत केवल इलाकों के नाम ही नहीं बदले जाएंगे, बल्कि कई ऐतिहासिक स्थलों और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण पर भी काम किया जाएगा। बताया जा रहा है कि “लाहौर अथॉरिटी फॉर हेरिटेज रिवाइवल” परियोजना के माध्यम से शहर की पुरानी पहचान को फिर से स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। इस अभियान से नवाज़ शरीफ़ भी जुड़े हुए बताए जा रहे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, लाहौर में विभाजन के बाद अनेक इलाकों और चौकों के नाम बदले गए थे। कृष्ण नगर को इस्लामपुरा, धर्मपुरा को मुस्तफाबाद और जैन मंदिर चौक को बाबरी मस्जिद चौक नाम दिया गया था। अब इन स्थानों को उनके ऐतिहासिक नामों से पुनः पहचान दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम लाहौर की बहुसांस्कृतिक विरासत—हिंदू, सिख, मुस्लिम और औपनिवेशिक इतिहास—को सम्मान देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है। हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस भी तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
[ad_2]








