कानून का पेशा सिर्फ रोजगार नहीं, समाजसेवा का माध्यम: सीजेआई सूर्यकांत

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डेस्क : भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कानून के विद्यार्थियों को पेशेवर जीवन में ईमानदारी, साहस और निष्पक्षता बनाए रखने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि कानून का पेशा कमजोर दिल वालों के लिए नहीं है। इस क्षेत्र में सफलता हासिल करने के लिए कानूनी ज्ञान के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, संवैधानिक प्रतिबद्धता और अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस भी जरूरी है।

लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, सीजेआई सूर्यकांत ने कानून के स्नातकों को संबोधित करते हुए न्याय व्यवस्था में वकीलों की भूमिका और उनकी जिम्मेदारियों पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि कानून की पढ़ाई पूरी करना केवल एक शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज और संविधान के प्रति एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी की शुरुआत है।

न्याय के लिए साहस और प्रतिबद्धता जरूरी

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि कानूनी पेशे में केवल कानून की धाराओं और न्यायालयों के फैसलों की जानकारी होना पर्याप्त नहीं है। एक अच्छे वकील में अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने, कमजोर लोगों के अधिकारों की रक्षा करने और कठिन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों पर कायम रहने का साहस होना चाहिए।

उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे अपने पेशेवर जीवन में नैतिकता को प्राथमिकता दें और किसी भी परिस्थिति में अपने मूल्यों से समझौता न करें।

दूसरों के विचारों को सुनना भी जरूरी

कानून के क्षेत्र में तर्क और संवाद के महत्व को रेखांकित करते हुए सीजेआई ने कहा कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले दूसरे पक्ष को सुनना चाहिए। विचारों में मतभेद होने के बावजूद प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा और उसके विचारों का सम्मान करना आवश्यक है।

उन्होंने कानून के विद्यार्थियों को स्वतंत्र रूप से सोचने, अलग-अलग दृष्टिकोणों को समझने और तथ्यों के आधार पर अपनी राय बनाने के लिए प्रेरित किया।

ईमानदारी से ही बनेगी पेशेवर पहचान

सीजेआई सूर्यकांत ने नए वकीलों को अपने करियर में आसान रास्ते अपनाने के बजाय ईमानदारी और मेहनत के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वकील की प्रतिष्ठा केवल उसकी कानूनी दक्षता से नहीं, बल्कि उसके आचरण और नैतिक मूल्यों से भी निर्धारित होती है।

उनके अनुसार, वकीलों को अपनी योग्यता का इस्तेमाल न्याय दिलाने, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने और संविधान में निहित आदर्शों को मजबूत बनाने के लिए करना चाहिए।

समाज के प्रति भी निभाएं जिम्मेदारी

सीजेआई ने कानून के पेशे को समाज की सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि वकीलों की जिम्मेदारी केवल अपने मुवक्किल का पक्ष रखने तक सीमित नहीं है। उन्हें न्याय व्यवस्था में लोगों का विश्वास बनाए रखने और जरूरतमंदों को न्याय दिलाने में भी योगदान देना चाहिए।

उन्होंने कानून के स्नातकों को याद दिलाया कि उनके पेशेवर फैसलों का प्रभाव लोगों के जीवन और समाज पर पड़ सकता है। इसलिए प्रत्येक कदम सोच-समझकर और जिम्मेदारी के साथ उठाया जाना चाहिए।

सीजेआई सूर्यकांत का संदेश स्पष्ट है कि एक सफल वकील बनने के लिए कानूनी ज्ञान के साथ साहस, निष्पक्षता, ईमानदारी और संवैधानिक मूल्यों के प्रति निष्ठा आवश्यक है। यही गुण न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने और समाज में कानून के प्रति विश्वास कायम रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।