डेस्क : अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच भारतीय उपभोक्ताओं के लिए सोमवार, 26 अक्टूबर को राहत की खबर है। ब्रेंट क्रूड का भाव 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। ऐसे में वाहन चालकों को फिलहाल ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से राहत मिली हुई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोमवार सुबह ब्रेंट क्रूड करीब 115.33 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड का भाव लगभग 101.78 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और सऊदी अरब को निशाना बनाए जाने की घटनाओं से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। बाजार में यह चिंता भी है कि यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है, तो तेल की आपूर्ति पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
इस साल करीब 90 प्रतिशत महंगा हुआ ब्रेंट क्रूड
रिपोर्ट के अनुसार, इस साल अब तक ब्रेंट क्रूड की कीमत में करीब 90 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। तेल की आपूर्ति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के कारण कीमतों में आगे भी तेजी आने की आशंका जताई जा रही है।
कॉमनवेल्थ बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के विश्लेषक विवेक धर के अनुमान के मुताबिक, यदि पश्चिम एशिया में संघर्ष और गहराता है, तो ब्रेंट क्रूड का वायदा भाव 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। हालांकि, यह एक अनुमान है और वास्तविक कीमतें बाजार की परिस्थितियों तथा वैश्विक आपूर्ति पर निर्भर करेंगी।
पेट्रोल-डीजल के आज के भाव
लाइव हिन्दुस्तान की 26 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें इस प्रकार हैं:
| शहर | पेट्रोल (₹/लीटर) | डीजल (₹/लीटर) |
|---|---|---|
| दिल्ली | 102.12 | 95.20 |
| मुंबई | 111.21 | 97.83 |
| कोलकाता | 113.51 | 99.82 |
| चेन्नई | 107.77 | 99.55 |
| पोर्ट ब्लेयर | 88.66 | 84.56 |
| चित्तूर, आंध्र प्रदेश | 118.34 | 106.06 |
नोट: ये दरें संबंधित रिपोर्ट में प्रकाशित आंकड़ों पर आधारित हैं। स्थानीय पेट्रोल पंप पर कीमत की पुष्टि कर लें।
क्या आगे बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी और रुपये की विनिमय दर में कमजोरी तेल कंपनियों की लागत बढ़ा सकती है।
फिलहाल सरकारी तेल कंपनियों की ओर से कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी की कोई घोषणा इस रिपोर्ट में नहीं की गई है। उपभोक्ताओं के लिए राहत कितने समय तक बनी रहेगी, यह अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल, तेल की आपूर्ति और कंपनियों की लागत पर निर्भर करेगा।









