मंदिर दान, वोट और सत्ता पर संग्राम: कीर्ति आज़ाद के आरोपों से गरमाई राजनीति


डेस्क : तृणमूल कांग्रेस के सांसद कीर्ति आज़ाद ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए उस पर व्यापक स्तर पर “भ्रष्टाचार और लूट” के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह कथित अनियमितताएँ मंदिरों के दान से लेकर चुनावी प्रक्रिया तक फैली हुई हैं।

कोलकाता में मीडिया से बातचीत करते हुए तृणमूल कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने भगवान श्रीराम के नाम पर एकत्र किए गए दान का भी दुरुपयोग किया है और उसे चुनावी अभियानों में खर्च किया गया।

उन्होंने कहा, “जब से भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई है, हर जगह लूट मची हुई है। उन्होंने भगवान राम के नाम पर इकट्ठा किए गए दान तक का गबन किया और उसी पैसे से चुनाव लड़े।”

कीर्ति आज़ाद ने आगे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाते हुए महाराष्ट्र और हरियाणा के हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में मतदाता सूची से लाखों नाम हटाए गए और हरियाणा में अपेक्षित कांग्रेस जीत के बावजूद भारतीय जनता पार्टी की जीत दर्ज हुई।

उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र में तीन महीने के भीतर 40 लाख वोट हटाए गए। हरियाणा में हर कोई कांग्रेस की जीत की बात कर रहा था, लेकिन परिणाम उलट आया। यह सब लूट है—दान की लूट, सीटों की लूट और मंदिर से जुड़ी वित्तीय अनियमितताएँ।”

सांसद ने आगे केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश को एक “एकाधिकार या तानाशाही” की ओर धकेला जा रहा है।

उन्होंने कहा, “हम इसलिए विरोध कर रहे हैं क्योंकि विपक्ष को खत्म करने की कोशिश हो रही है। अगर विपक्ष ही नहीं रहेगा तो देश कैसे चलेगा? क्या यह तानाशाही नहीं है?”

यह बयान ऐसे समय में आया है जब मंदिर से जुड़ी कथित दान हेराफेरी को लेकर देशभर में राजनीतिक विवाद गहरा गया है। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने पलटवार करते हुए विपक्ष पर राम मंदिर निर्माण के विरोध और राजनीतिक रूप से विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया है।

इस बीच सोमवार को अयोध्या की एक स्थानीय अदालत ने कथित दान घोटाले के सभी आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। यह फैसला उत्तर प्रदेश पुलिस की उस जांच के बाद आया है जिसमें श्री राम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े दान और चढ़ावे में वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले थे।

फिलहाल मामले की जांच विशेष जांच दल द्वारा जारी है और इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

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