मुनि श्री तरुण रुचि जी का संदेश: “बीती ताहि बिसारी दे” से सीखें शांत जीवन


जयपुर :निर्माण नगर स्थित महाप्रज्ञ इंटरनेशनल स्कूल के संबोधि सभागार में गुरुवार को “बीती ताहि बिसारी दे” विषय पर एक विशेष आध्यात्मिक प्रवचन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य प्रवचनकर्ता मुनि श्री तरुण रुचि जी ‘तरुण’ ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि परस्पर शांत सहवास के लिए यह आवश्यक है कि हम दूसरों की भूलों को भूलकर अपनी भूलों को सुधारने का प्रयास करें।

मुनि श्री तरुण रुचि जी ने कहा कि “बीती ताहि बिसारी दे” केवल एक भाव नहीं, बल्कि शांत और सौहार्दपूर्ण जीवन का महत्वपूर्ण सूत्र है। उन्होंने कहा कि बीती बातों को दोहराकर वातावरण को कलुषित करना उचित नहीं है। “रात गई और बात गई” की भावना अपनाते हुए हमें अतीत की कटु स्मृतियों को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से कलह और तनाव ही बढ़ता है। जो व्यक्ति बार-बार पुरानी बातों को उकेरता है, वह कभी शांत सह-अस्तित्व का निर्माण नहीं कर सकता।

इस अवसर पर मुनि श्री संभव कुमार जी महाराज ने भी प्रवचन प्रदान किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में लोगों की सहनशीलता लगातार घटती जा रही है, जिसके कारण वे छोटी-छोटी बातों को भी सहज रूप से स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी की कही गई बात को पकड़कर मन में गांठ बांध लेना उचित नहीं है, क्योंकि इससे व्यक्ति स्वयं का ही नहीं, बल्कि दूसरों का भी नुकसान करता है।

मुनि श्री संभव कुमार जी महाराज ने आगे कहा कि अच्छी बातों को भुला देना और बुरी बातों को मन में संजोकर रखना उचित नहीं माना जा सकता। यही प्रवृत्ति मानसिक तनाव और चिंता का प्रमुख कारण बनती है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति सुखपूर्वक जीवन जीना चाहता है, उसे नकारात्मक अनुभवों को मन में संग्रहित करने से बचना चाहिए और उन्हें भुलाने का प्रयास करना चाहिए।

कार्यक्रम का शुभारंभ तीर्थंकर संभव प्रभु की स्तुति के साथ हुआ। प्रवचन से पूर्व प्रेक्षाध्यान एवं जप अनुष्ठान साधना भी कराई गई। आध्यात्मिक वातावरण में सम्पन्न इस धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और प्रवचनों का श्रवण किया।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles