लखनऊ : उत्तर प्रदेश कांग्रेस में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान एक बार फिर सार्वजनिक रूप से सामने आ गई। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के स्वागत कार्यक्रम से दूर रखे जाने के बाद पार्टी के भीतर गुटबाजी और संगठनात्मक असंतोष को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
मंगलवार को राहुल गांधी अपने दौरे के तहत लखनऊ पहुंचे थे। अमौसी एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के लिए प्रदेश कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों को प्रवेश पास जारी किए गए थे, लेकिन पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू का नाम सूची में शामिल नहीं था। बताया जा रहा है कि उन्हें एयरपोर्ट परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं मिली, जिसके बाद वह बाहर ही समर्थकों के साथ मौजूद रहे।
हालांकि, एयरपोर्ट से बाहर निकलते समय राहुल गांधी ने अपनी गाड़ी रोककर अजय कुमार लल्लू से बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच कुछ देर चर्चा भी हुई। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या उत्तर प्रदेश कांग्रेस में पुराने और नए नेतृत्व के बीच दूरी बढ़ती जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल प्रोटोकॉल या प्रशासनिक चूक तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश संगठन के भीतर चल रही खींचतान का संकेत भी माना जा रहा है। पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश कांग्रेस में कई वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता और संगठन में उनकी भूमिका को लेकर असंतोष की खबरें सामने आती रही हैं।
अजय कुमार लल्लू को कभी उत्तर प्रदेश कांग्रेस का आक्रामक और जमीनी चेहरा माना जाता था। किसान आंदोलनों और सड़क संघर्षों के कारण उन्होंने प्रदेश राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई थी। प्रदेश अध्यक्ष पद से हटने के बाद भी वह लगातार संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। ऐसे में राहुल गांधी के स्वागत कार्यक्रम से उनका नाम बाहर रहना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वहीं, कांग्रेस के भीतर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर आधिकारिक रूप से कोई बयान सामने नहीं आया है। पार्टी सूत्र इसे महज व्यवस्थागत मामला बता रहे हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।


