नई दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने टेलीग्राम ऐप पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध के खिलाफ दायर याचिका को खारिज करते हुए केंद्र सरकार के फैसले को बरकरार रखा है। यह प्रतिबंध NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा से पहले परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू किया गया था।
अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जारी आदेश प्रथम दृष्टया “तर्कसंगत” है और इसे सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के अंतर्गत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए जारी किया गया है। अदालत ने यह भी माना कि परीक्षा प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों को मनमाना नहीं कहा जा सकता।
केंद्र सरकार की ओर से अदालत में दलील दी गई कि टेलीग्राम का उपयोग कुछ संगठित समूहों द्वारा परीक्षा से जुड़े प्रश्नपत्र लीक करने, फर्जी पेपर बेचने और अभ्यर्थियों को गुमराह करने के लिए किया जा रहा था। सरकार के अनुसार ऐसे नेटवर्क को रोकने के लिए अस्थायी रूप से प्लेटफॉर्म को प्रतिबंधित करना आवश्यक कदम था।
वहीं टेलीग्राम की ओर से कहा गया कि इस तरह का व्यापक प्रतिबंध लाखों वैध उपयोगकर्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन करता है और यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि केवल कुछ आपराधिक गतिविधियों के आधार पर पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करना उचित नहीं है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नियंत्रण और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में सरकार का निर्णय परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा के लिए आवश्यक प्रतीत होता है।
गौरतलब है कि यह प्रतिबंध NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा से ठीक पहले लागू किया गया था और इसे लेकर देशभर में डिजिटल अधिकारों और इंटरनेट स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज हो गई थी।


