ट्रंप ने रूस से जुड़े प्रतिबंधों और टैरिफ पर लगाई रोक, भारत-चीन को बड़ी राहत

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डेस्क : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से जुड़े प्रतिबंधों और टैरिफ को लागू करने पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर भारी शुल्क लगाने की समयसीमा समाप्त होने वाली थी। ट्रंप के इस कदम से भारत और चीन को फिलहाल बड़ी राहत मिली है।

ट्रंप ने शुक्रवार देर रात जारी कार्यकारी आदेश में कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए संबंधित प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों के क्रियान्वयन को फिलहाल रोकने का निर्णय लिया है। उन्होंने इस संबंध में अमेरिकी कांग्रेस को भी सूचित किया है।

हालांकि, इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि प्रस्तावित टैरिफ पूरी तरह समाप्त कर दिए गए हैं। आदेश के तहत इनके क्रियान्वयन को केवल स्थगित किया गया है। भविष्य में ट्रंप चाहें तो इन्हें दोबारा लागू कर सकते हैं।

रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर था 100 प्रतिशत टैरिफ का खतरा

पिछले महीने ट्रंप ने रूस और ईरान से संबंधित प्रतिबंधों को लेकर एक विधेयक पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान था। इसमें भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देशों को निशाना बनाया जा सकता था।

विधेयक में रूस की ऊर्जा से जुड़े कारोबार पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने और रूसी ऊर्जा उत्पादों के अमेरिकी आयात पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान भी शामिल था। इसका मुख्य उद्देश्य यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए रूस को मिलने वाले आर्थिक संसाधनों को सीमित करना था।

इस कानून के तहत ट्रंप को संबंधित कदम उठाने के लिए 30 दिनों का समय दिया गया था, जिसकी समयसीमा 18 अक्टूबर को समाप्त होने वाली थी।

भारत के निर्यात पर पड़ सकता था असर

यदि अमेरिका भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाता, तो भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में भारी शुल्क का सामना करना पड़ सकता था। इससे भारत के निर्यातकों और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों पर असर पड़ने की आशंका थी।

भारत और अमेरिका के बीच पिछले वर्ष उस समय तनाव बढ़ गया था, जब ट्रंप प्रशासन ने रूस से कच्चा तेल खरीदने के मुद्दे पर भारतीय आयात पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। यह शुल्क पहले से लागू 25 प्रतिशत पारस्परिक टैरिफ के अतिरिक्त था।

हालांकि, फरवरी 2026 में अतिरिक्त टैरिफ हटा लिया गया था और दोनों देशों के बीच व्यापार ढांचे पर बनी सहमति के तहत पारस्परिक टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया था।

भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को बताया था प्राथमिकता

अमेरिकी कांग्रेस में रूस से जुड़े प्रतिबंधों संबंधी विधेयक पारित होने के बाद भारत ने स्पष्ट किया था कि वह अपने व्यापारिक और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि देश के 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए भारत विभिन्न स्रोतों से ऊर्जा की खरीद जारी रखेगा और बदलती वैश्विक बाजार परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेगा।

मंत्रालय के अनुसार, रूस से भारत के तेल व्यापार के मुद्दे पर हाल के महीनों में अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर चर्चा भी हुई थी। भारत ने इस विषय के द्विपक्षीय संबंधों और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों से अमेरिका को अवगत कराया था।

पुतिन के प्रति ट्रंप का बदलता रुख भी चर्चा में

ट्रंप का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रति उनके रुख और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की आलोचना को लेकर चर्चा तेज है।

हाल ही में ट्रंप ने रूस के साथ डीजल आपूर्ति से जुड़े एक समझौते की घोषणा की थी। इसके तहत रूस तत्काल 3 लाख टन से अधिक डीजल अमेरिका को उपलब्ध कराएगा, जबकि आने वाले महीनों में आगे की आपूर्ति भी की जाएगी।

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इस समझौते की आलोचना करते हुए इसे सहयोगियों के लिए अनुचित निर्णय बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि रूस समझौते के बावजूद यूक्रेन पर हमले जारी रख रहा है।

ट्रंप ने दूसरी ओर जेलेंस्की की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यूक्रेन को ऐसा नया नेता चुनना चाहिए, जो रूस के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए समझौता कर सके।

फिलहाल रूस से जुड़े टैरिफ पर रोक से भारत और चीन को राहत मिली है, लेकिन अमेरिकी प्रशासन के अगले कदमों पर दोनों देशों के व्यापारिक हितों की नजर बनी रहेगी।