विश्व बैंक का बड़ा फैसला: 2031 तक चीन को नहीं मिलेगा कोई नया ऋण


डेस्क :  विश्व बैंक वर्ष 2031 तक चीन को दिए जाने वाले अपने ऋण को पूरी तरह समाप्त कर देगा। यह निर्णय संगठन के नए कंट्री पार्टनरशिप फ्रेमवर्क के तहत लिया गया है, जो चीन के साथ उसके बदलते आर्थिक संबंधों को दर्शाता है। इस घटनाक्रम की पुष्टि मामले से जुड़े एक सूत्र ने की। इससे पहले फाइनेंशियल टाइम्स ने भी इस संबंध में रिपोर्ट प्रकाशित की थी।

विश्व बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि पिछले कई दशकों में चीन ने आर्थिक और सामाजिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। इस यात्रा में विश्व बैंक सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों का योगदान रहा है।

अधिकारी ने कहा, “चीन ने पिछले दशकों में विकास के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। अब हमारे संबंध एक नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं, जो इस बदली हुई वास्तविकता को दर्शाते हैं।”

ऋणदाता नहीं, ‘ज्ञान साझेदार’ बनेगा विश्व बैंक

विश्व बैंक के अनुसार, आने वाले वर्षों में चीन को वित्तीय सहायता देने के बजाय संस्था तकनीकी सहयोग, नीतिगत सलाह और विकास संबंधी विशेषज्ञता उपलब्ध कराने पर अधिक ध्यान देगी।

अधिकारी ने कहा, “चीन के विकास स्तर को देखते हुए विश्व बैंक की भूमिका अब ऋणदाता से बदलकर ‘ज्ञान साझेदार’ की हो रही है।”

लगातार घट रही है चीन को मिलने वाली वित्तीय सहायता

चीन की तेज आर्थिक वृद्धि और गरीबी में उल्लेखनीय कमी के साथ ही विश्व बैंक की ओर से उसे मिलने वाला ऋण लगातार घटता गया है।

वर्ष 2017 में विश्व बैंक ने चीन को 2.42 अरब डॉलर का ऋण दिया था, जो हाल के वर्षों में लगातार कम होकर 2025 में 75 करोड़ डॉलर रह गया। नए ढांचे के तहत इसे 2031 तक शून्य कर दिया जाएगा।

अमेरिका लंबे समय से उठा रहा था सवाल

विश्व बैंक का यह कदम ऐसे समय आया है जब अमेरिका लंबे समय से चीन को दिए जाने वाले ऋण पर सवाल उठाता रहा है।

अपने पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व बैंक से चीन को पूरी तरह ऋण देना बंद करने की मांग की थी। उनका तर्क था कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को अब विकास ऋण की आवश्यकता नहीं है। हालांकि दूसरे कार्यकाल में भी चीन के प्रति उनका रुख कड़ा बना हुआ है, लेकिन उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस मांग को दोहराया नहीं है।

ऋण लेने के साथ-साथ बड़ा दाता भी है चीन

दिलचस्प बात यह है कि एक ओर जहां चीन विश्व बैंक से ऋण लेता रहा है, वहीं दूसरी ओर वह विश्व बैंक के अंतरराष्ट्रीय विकास संघ (आईडीए) के लिए भी बड़ा वित्तीय योगदान देता है। यह कोष दुनिया के सबसे गरीब देशों के विकास के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

नवीनतम पुनर्भरण चक्र में चीन ने 1.5 अरब डॉलर का योगदान दिया है, जिससे वह इस कोष का पांचवां सबसे बड़ा दाता बन गया है।

पोलैंड के लिए भी अपनाई गई समान रणनीति

विश्व बैंक ने 16 जून को पोलैंड के लिए भी इसी तरह की योजना की घोषणा की थी। इसके तहत वर्ष 2031 तक पोलैंड को दिए जाने वाले ऋण को भी समाप्त कर दिया जाएगा, जबकि तकनीकी सहायता और नीतिगत सहयोग जारी रहेगा।

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