वोट बैंक के लिए कांग्रेस ने वंदे मातरम् भुलाया: अमित शाह का सोनिया गांधी पर सीधा हमला

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डेस्क : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में कांग्रेस पर वंदे मातरम् को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वर्षों तक वोट बैंक की राजनीति के चलते राष्ट्रगीत को भुलाए रखा और अब जब देशभर में वंदे मातरम् को फिर से प्रमुखता मिल रही है, तो कांग्रेस के भीतर इसे लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है।

अमित शाह चित्तौड़गढ़ में आयोजित ‘अटल गौरव स्मृति समारोह’ को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले और देशभर में हुए ध्वजारोहण कार्यक्रमों का जिक्र करते हुए कहा कि आजादी के 80 वर्ष बाद पहली बार देशभर में वंदे मातरम् के गायन को विशेष रूप से प्रमुखता मिली है।

शाह ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् के गायन के दौरान सोनिया गांधी ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से गीत रोकने को कहा। शाह ने इसे राष्ट्रगीत का अपमान बताते हुए कांग्रेस से माफी मांगने की मांग की।

‘कांग्रेस को देश से माफी मांगनी चाहिए’

अमित शाह ने कहा कि वंदे मातरम् देश के स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। उन्होंने कहा कि इस गीत को गाते हुए हजारों स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया और बलिदान दिया।

उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी ने वोट बैंक के लालच में वंदे मातरम् को भुला दिया। शाह ने कहा कि यदि कांग्रेस नेताओं में थोड़ी भी संवेदनशीलता बची है तो उन्हें देश की जनता और वंदे मातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय से माफी मांगनी चाहिए।

कांग्रेस ने आरोपों को बताया गलत

वंदे मातरम् को लेकर भाजपा के आरोपों पर कांग्रेस ने सफाई दी है। कांग्रेस का कहना है कि पार्टी मुख्यालय में पूरा वंदे मातरम् गाया गया और इसे रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई। पार्टी के अनुसार, सोनिया गांधी ने केवल 81 वर्षीय मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी लाने को कहा था, क्योंकि वह काफी देर से खड़े थे।

इस मुद्दे को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा जहां इसे राष्ट्रगीत के अपमान से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस इसे गलत तरीके से पेश किए जाने का आरोप लगा रही है। ऐसे में वंदे मातरम् को लेकर उठा यह विवाद स्वतंत्रता दिवस के अगले दिन राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा बन गया है।