वसीयत के नाम पर पिता से कराई सेल डीड, बेटी को मकान खाली करने का आदेश

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नई दिल्ली :  राजधानी दिल्ली में संपत्ति विवाद का एक मामला सामने आया है, जिसमें एक बुजुर्ग पिता ने अपनी ही बेटी पर धोखे से मकान की रजिस्ट्री कराने का आरोप लगाया था। पिता ने इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ी, लेकिन वर्ष 2016 में उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद उनकी चार बेटियों ने मुकदमे को आगे बढ़ाया। अब दिल्ली हाईकोर्ट ने सबसे छोटी बेटी को मकान खाली कर उसका कब्जा अन्य चार बहनों को सौंपने का आदेश दिया है।

मामले के अनुसार, रामसरूप ने वर्ष 2006 में अपनी पांचों बेटियों को संपत्ति में हिस्सा देने के लिए वसीयत बनवाने का फैसला किया था। इसके लिए उन्होंने अपनी सबसे छोटी बेटी की मदद ली। आरोप है कि बेटी ने पिता के कम पढ़े-लिखे होने का फायदा उठाकर वसीयत के बजाय अपने नाम की सेल डीड तैयार कराई और उस पर उनके हस्ताक्षर करवा लिए।

2013 में सामने आया मामला

बताया गया है कि छोटी बेटी उसी वर्ष पिता के साथ रहने लगी। रामसरूप ने कई बार उससे वसीयत के दस्तावेज मांगे, लेकिन वह टालती रही। वर्ष 2013 में अन्य बेटियों की मदद से सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से दस्तावेजों की प्रति निकलवाने पर पिता को कथित धोखाधड़ी की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और नई वसीयत बनवाकर छोटी बेटी को संपत्ति से बेदखल कर दिया।

रामसरूप ने इस मामले में कानूनी लड़ाई जारी रखी, लेकिन वर्ष 2016 में उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद उनकी अन्य चार बेटियों ने न्यायिक लड़ाई जारी रखी।

मकान की कीमत और भुगतान पर उठे सवाल

अदालत के समक्ष यह तथ्य भी आया कि संबंधित मकान की कीमत वर्ष 2006 में करीब 60 लाख रुपये बताई गई थी, जबकि छोटी बेटी ने इसे अपने पिता से एक लाख रुपये में खरीदने का दावा किया था। अदालत ने मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और परिस्थितियों पर विचार किया। इनमें बुजुर्ग की कमजोर दृष्टि, सीमित शारीरिक क्षमता और अंग्रेजी भाषा का ज्ञान न होना भी शामिल था।

मामले में पिता की ओर से दर्ज कराई गई पुलिस शिकायत और बेटी के बैंक खाते से संबंधित जानकारी को भी महत्वपूर्ण माना गया।

हाईकोर्ट का आदेश

मामले में पहले आए फैसले के बावजूद छोटी बेटी ने मकान खाली नहीं किया और फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। अब हाईकोर्ट ने उसे तत्काल मकान खाली करने और अन्य चार बहनों को कब्जा दिलाने का आदेश दिया है। इस फैसले के साथ लंबे समय से चल रहे पारिवारिक संपत्ति विवाद में चारों बहनों को राहत मिली है।