मॉस्को: रूस ने शुक्रवार को कहा कि वह यूरोपीय देशों के साथ संवाद के लिए तैयार है, लेकिन किसी भी प्रकार के दबाव या अल्टीमेटम के आधार पर बातचीत स्वीकार नहीं करेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब संकेत मिल रहे हैं कि यूरोपीय संघ (ईयू) यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से लगभग ठप पड़े कूटनीतिक संपर्कों को फिर से बहाल करने पर विचार कर रहा है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय एजेंडे पर मौजूद जटिल मुद्दों की बड़ी संख्या को देखते हुए रूस और यूरोप के बीच संवाद आवश्यक है। हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोपीय देशों की सोच अब भी इस धारणा से प्रभावित है कि रूस से बातचीत केवल तब की जा सकती है जब वह कमजोर स्थिति में हो।
पेसकोव ने कहा कि यह यूरोप की सबसे बड़ी रणनीतिक भूल है। उनके अनुसार, यदि बातचीत की शुरुआत इसी मानसिकता के साथ की जाएगी तो किसी सकारात्मक परिणाम की उम्मीद नहीं की जा सकती।
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहले भी कई बार कह चुके हैं कि रूस यूरोपीय देशों के साथ वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन पहल यूरोप को करनी चाहिए क्योंकि संबंध तोड़ने का निर्णय उसी ने लिया था। यूक्रेन पर रूस के सैन्य अभियान के बाद से यूरोपीय संघ रूस पर 20 चरणों में प्रतिबंध लगा चुका है।
यूरोप के रुख में बदलाव के संकेत
पिछले डेढ़ वर्ष से अधिक समय तक यूक्रेन संघर्ष के समाधान के प्रयासों में यूरोप अपेक्षाकृत पीछे रहा और मध्यस्थता की जिम्मेदारी मुख्य रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रयासों पर छोड़ दी गई। अब यूरोपीय संघ के कुछ नेताओं के बयान संकेत दे रहे हैं कि मॉस्को के साथ संवाद की संभावनाओं पर फिर से विचार किया जा रहा है।
एक यूरोपीय अधिकारी ने बताया कि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के कार्यालय ने हाल के सप्ताहों में क्रेमलिन के साथ राजनयिक स्तर पर संक्षिप्त संपर्क स्थापित किए हैं। इन संपर्कों का उद्देश्य संवाद के चैनलों को पुनः खोलना बताया गया है।
वहीं ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर ने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि यूक्रेन में शांति वार्ता को लेकर जो नई गति दिखाई दे रही है, उसका लाभ उठाते हुए यूरोपीय संघ को पुतिन के साथ बातचीत फिर से शुरू करने पर विचार करना चाहिए।
इन संकेतों पर प्रतिक्रिया देते हुए पेसकोव ने कहा कि रूस वास्तविक संवाद के लिए तैयार है, बशर्ते दूसरी ओर भी गंभीरता और खुलेपन की भावना हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस नैतिक उपदेशों या धमकी भरे अल्टीमेटम के आधार पर बातचीत नहीं करेगा।
यूरोपीय संघ के भीतर मतभेद
हालांकि मॉस्को से संपर्क स्थापित करने के प्रयासों को लेकर यूरोपीय संघ के भीतर एकमत राय नहीं है। ब्रुसेल्स में आयोजित हालिया शिखर सम्मेलन के दौरान कुछ सदस्य देशों ने शिकायत की कि कोस्टा की पहल के बारे में उन्हें पहले से जानकारी नहीं दी गई थी।
कई देशों का मानना है कि रूस पर दबाव बढ़ाने की नीति जारी रहनी चाहिए, जबकि कुछ अन्य सदस्य कूटनीतिक संवाद को आगे बढ़ाने के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि रूस के साथ भविष्य के संबंधों को लेकर यूरोप अभी भी आंतरिक मतभेदों से जूझ रहा है।
यूक्रेन के ड्रोन हमले जारी
कूटनीतिक हलचलों के बीच युद्ध का मैदान अब भी सक्रिय है। यूक्रेन ने हाल के महीनों में रूस के भीतर गहराई तक ड्रोन हमलों की अपनी रणनीति को तेज किया है। यूक्रेनी पक्ष का दावा है कि बंदरगाहों, तेल रिफाइनरियों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर वह युद्ध की दिशा बदलने में सफल हो रहा है।
रूस के अधिकारियों के अनुसार, गुरुवार को मॉस्को और उसके आसपास के क्षेत्रों पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला किया गया। मॉस्को क्षेत्र के गवर्नर ने बताया कि इस हमले में आठ वर्षीय एक बच्ची की मौत हो गई। साथ ही दक्षिण-पूर्वी मॉस्को स्थित एक बड़ी तेल रिफाइनरी में तीन दिनों के भीतर दूसरी बार आग लग गई।
पेसकोव ने स्वीकार किया कि ड्रोन हमले लगातार जारी हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि रूसी प्रशासन उनके प्रभाव को कम करने के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है।
रूस ने दोहराया है कि यदि कोई स्वीकार्य कूटनीतिक समाधान नहीं निकलता है तो वह अपने घोषित उद्देश्यों की प्राप्ति तक सैन्य अभियान जारी रखेगा। ऐसे में एक ओर जहां युद्ध के मोर्चे पर संघर्ष जारी है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक स्तर पर संवाद की संभावनाएं भी धीरे-धीरे आकार लेती दिखाई दे रही हैं।


