डेस्क : पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के सिविल लाइंस स्थित करेंसी चेस्ट से मिले 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोटों के हाई-प्रोफाइल मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। रविवार को जांच एजेंसी ने इस साजिश में शामिल दो और मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इसके साथ ही इस मामले में गिरफ्तार होने वाले आरोपियों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। एनआईए की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से जाली नोटों के सिंडिकेट से जुड़े अपराधियों में हड़कंप मचा हुआ है।
एनआईए के अनुसार, ताजा कार्रवाई में गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान मुकेश कुमार (निवासी हसनपुर कदीम, थाना सदर/मनोहरपुर) और राजेंद्र कुमार (निवासी कल्याणपुर, सरसावा) के रूप में हुई है। जांच एजेंसी का कहना है कि ये दोनों आरोपी इस पूरी साजिश के मास्टरमाइंड्स में से एक और बैंक के संविदा चालक आदेश चौधरी के करीबी सहयोगी हैं। आदेश चौधरी को एनआईए ने गत 15 सितंबर को गिरफ्तार किया था।
करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे जाली नोट? NIA खंगाल रही नेटवर्क
यह मामला पहली बार 29 अगस्त को सामने आया था, जब सहारनपुर के सदर बाजार थाने को पीएनबी के करेंसी चेस्ट से 17.29 करोड़ रुपये के फर्जी भारतीय नोट मिलने की सूचना मिली थी। शुरुआती विभागीय जांच के आधार पर बैंक प्रबंधन ने तत्काल तीन कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था और पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई थी।
मामले की गंभीरता और वित्तीय सुरक्षा से जुड़े तारों को देखते हुए 3 सितंबर को एनआईए ने केस दर्ज कर जांच की कमान अपने हाथों में ले ली थी। इसके बाद एजेंसी ने 7 सितंबर को नामजद आरोपी अमित कुमार को दबोचा, जबकि 15 सितंबर को करेंसी चेस्ट के वाहन चालक आदेश चौधरी की गिरफ्तारी हुई।
एनआईए अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और पूरी साजिश का पर्दाफाश करने के प्रयास जारी हैं। एजेंसी अब मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है—
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करेंसी चेस्ट जैसी सुरक्षित जगह तक इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट कैसे पहुंचे?
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इस पूरे सिंडिकेट में बैंक अधिकारियों और बाहरी नेटवर्क की क्या भूमिका थी?
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इन जाली नोटों को बाजार में खपाने की क्या योजना बनाई गई थी?
एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि मामले में शामिल अन्य संदिग्धों और सह-आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है और जल्द ही कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।








