2008 का रिप्‍ले, अगस्‍त तक होर्मुज स्‍ट्रेट बंद रहा तो महामंदी, बड़ी चेतावनी

0

[ad_1]

नई दिल्‍ली: अगस्त तक होर्मुज स्‍ट्रेट के बंद रहने से 2008 की महामंदी के समान आर्थिक मंदी का खतरा बढ़ गया है। रैपिडन एनर्जी ग्रुप ने यह चेतावनी दी है। एडवाइजरी फर्म ने कहा कि उसके अनुमान के अनुसार, यह जलमार्ग जुलाई में फिर से खुल जाएगा। इससे तेल की औसत मांग में रोजाना 26 लाख बैरल की कमी आएगी। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की हाजिर बाजार कीमत गर्मियों में लगभग 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाएगी।

रैपिडन ने कहा कि जुलाई के बाद भी व्यवधान जारी रहने पर अगस्त और सितंबर में सप्‍लाई में आई कमी की भरपाई के लिए मांग में और भी अधिक गिरावट की जरूरत होगी। मुमकिन है कि यह 2026 में ग्‍लोबल ऑयल कंजम्‍पशन में सालाना गिरावट को ट्रिगर करने के लिए काफी होगी।

अमेरिका-ईरान अपने-अपने रुख पर कायम

यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब गुरुवार को अमेरिका और ईरान ने तेहरान के यूरेनियम भंडार और होर्मुज स्‍ट्रेट पर कंट्रोल को लेकर अपने विपरीत रुख को बरकरार रखा। हालांकि, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि वार्ता में ‘कुछ सकारात्मक संकेत’ मिले हैं।

एडवाइजरी फर्म ने कहा कि अगस्त तक की देरी से तीसरी तिमाही में सप्‍लाई घाटा बढ़कर लगभग 60 लाख बैरल प्रतिदिन हो जाएगा। ठीक उसी समय जब भंडार परिचालन संबंधी चुनौतियों के करीब पहुंच रहे हैं।

रैपिडन के अनुसार, अगस्त की शुरुआत में उत्पादन फिर से शुरू होने पर भी राहत मिलने से पहले ही बाजार तंग हो जाएंगे। सितंबर तक कच्चे तेल का भंडार घटता रहेगा। जबकि अरब खाड़ी का उत्पादन धीरे-धीरे बढ़ेगा। शिपमेंट अपने डेस्टिनेशन तक पहुंचने लगेंगे।

बढ़ रही है मंदी की आशंका

  • कंपनी ने यह भी कहा कि कई प्रमुख पूर्वानुमान लगाने वालों को एक डर है।
  • उन्हें इस साल ग्‍लोबल डिमांड में एक खास तरह की गिरावट की आशंका है।
  • फरवरी के अंत से तेल की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं।
  • कारण है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध ने ग्‍लोबल बाजारों को अस्त-व्यस्त कर दिया है।
  • महंगाई में बढ़ोतरी और विकास में मंदी की आशंका को बढ़ा दिया है।

रैपिडन के विश्लेषकों ने एक नोट में लिखा, ‘मौजूदा मैक्रो सेटअप 1970 के दशक या 2007-08 की तुलना में कम एक्‍सट्रीम (चरम) है।’ उसने कम तेल-निर्भर अर्थव्यवस्थाओं और अधिक विश्वसनीय मॉनेटरी पॉलिसी फ्रेमवर्क का हवाला देते हुए कहा, ‘लेकिन यह अपेक्षाकृत मजबूत शुरुआती पॉइंट इस जोखिम को खत्म नहीं करता है कि तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी वित्तीय और मैक्रोइकोनॉमिक कमजोरियों को और बढ़ा देगी।’

तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका आखिरकार ईरान के एनरिच्‍ड यूरेनियम भंडार को दोबारा हासिल कर लेगा। इसके बारे में वॉशिंगटन का मानना है कि इसका इस्‍तेमाल परमाणु हथियार बनाने के लिए किया जाना है। हालांकि, तेहरान का कहना है कि इसका इस्‍तेमाल पूरी तरह से शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
गुरुवार को अस्थिर कारोबारी सत्र में तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। युद्ध के समाधान की अनिश्चित संभावनाओं के कारण कीमतें गिर गईं।
ट्रंप ने कहा है कि अगर उन्हें ईरान के नेतृत्व से ‘सही जवाब’ नहीं मिलते तो वह फिर से हमले शुरू करने के लिए तैयार हैं। ये हमले अमेरिका और उसके सहयोगी इजरायल ने सबसे पहले फरवरी के आखिर में शुरू किए थे। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि अगर फिर से हमले हुए तो उसका बदला इस क्षेत्र से बाहर तक लिया जाएगा।

[ad_2]