मुंबई : भारतीय शेयर बाजार में लगातार गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी लगातार आठवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुए। करीब 25 वर्षों के बाद बाजार में इतनी लंबी साप्ताहिक गिरावट देखने को मिली है। पिछले आठ सप्ताह में सेंसेक्स करीब 8.4 प्रतिशत और निफ्टी लगभग 8.7 प्रतिशत टूट चुका है। इस दौरान बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण भी 26 लाख करोड़ रुपये से अधिक घट गया।
गुरुवार को कारोबार के दौरान भी बाजार में भारी बिकवाली रही। सेंसेक्स 570 अंक की गिरावट के साथ 71,909.70 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी करीब 199 अंक टूटकर 22,422 अंक के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली को गिरावट की प्रमुख वजहों में माना जा रहा है।
चार दिन में 34,965 करोड़ की बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 1 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में करीब 9,484 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की। इसके साथ ही पिछले चार कारोबारी दिनों में एफआईआई की कुल बिकवाली करीब 34,965 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। सितंबर में भी विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार से करीब 46 हजार करोड़ रुपये की निकासी की थी।
हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने बाजार को सहारा देने की कोशिश की। 1 अक्टूबर को डीआईआई ने करीब 10,042 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की।
कच्चे तेल और रुपये की कमजोरी का असर
बाजार पर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का भी दबाव बना हुआ है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से विदेशी निवेशकों के निवेश रुख में बदलाव देखा जा रहा है। दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बने रहने से भारत के आयात बिल और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी है।
डॉलर के मुकाबले रुपये में भी कमजोरी जारी रही। 1 अक्टूबर को रुपया करीब 0.5 प्रतिशत कमजोर होकर 96.31 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ। कच्चे तेल की ऊंची कीमत, कमजोर रुपया और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार की धारणा पर दबाव बढ़ाया है।
बाजार विशेषज्ञों की नजर अब विदेशी निवेशकों के अगले रुख, कच्चे तेल की कीमत, रुपये की चाल और वैश्विक बाजारों के संकेतों पर रहेगी। गांधी जयंती के कारण 2 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार नहीं होगा।








