600 पन्नों की चार्जशीट में हनीट्रैप की पूरी कहानी, श्वेता पर मास्टरमाइंड होने का आरोप

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इंदौर : मध्य प्रदेश के चर्चित हनी ट्रैप पार्ट-2 मामले में पुलिस ने जांच पूरी कर करीब 600 पन्नों का चालान न्यायालय में पेश किया है। पुलिस के अनुसार, वर्ष 2019 के हनी ट्रैप मामले में आरोपी रह चुकी श्वेता विजय जैन को इस मामले में कथित गिरोह की मुख्य सरगना बताया गया है। सागर निवासी रेशू चौधरी को उसकी सहयोगी बताया गया है। मामले में कुल सात लोगों को आरोपी बनाया गया है।

यह मामला शराब और प्रॉपर्टी कारोबारी हितेंद्र उर्फ चिंटू ठाकुर की शिकायत के बाद सामने आया था। कारोबारी ने 18 मई को क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक, उन्हें प्रॉपर्टी कारोबार में हिस्सेदारी देने या एक करोड़ रुपये देने के लिए कथित तौर पर दबाव बनाया गया था। फोटो और वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया था।

जांच में सामने आया श्वेता का नाम

पुलिस के अनुसार, शुरुआती एफआईआर में श्वेता विजय जैन का नाम नहीं था। जांच आगे बढ़ने और आरोपितों के बयान दर्ज होने के बाद उसका नाम सामने आया। इसके बाद पुलिस ने श्वेता को गिरफ्तार कर पूछताछ की। पुलिस का दावा है कि पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उसे कथित गिरोह की मुख्य भूमिका में पाया गया।

जांच में सागर की रेशू चौधरी का नाम भी सामने आया। पुलिस ने उसे श्वेता की सहयोगी बताते हुए आरोप लगाया है कि वह फोटो और वीडियो के जरिए लोगों पर दबाव बनाने की कथित योजना में शामिल थी।

फोटो-वीडियो के जरिए ब्लैकमेल का आरोप

पुलिस के अनुसार, आरोपितों ने संगठित तरीके से लोगों को निशाना बनाकर फोटो और वीडियो के माध्यम से कथित तौर पर ब्लैकमेल करने और आर्थिक लाभ हासिल करने की योजना बनाई थी। पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ संगठित अपराध से संबंधित धाराएं भी लगाई हैं।

मामले की जांच अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। पुलिस ने नौ मोबाइल फोन और दो पेनड्राइव समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। इनकी फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट अभी आना बाकी है। जांच अधिकारियों के मुताबिक, डिजिटल उपकरणों से चैट, फोटो, वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद बढ़ सकता है मामला

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच में यदि कोई नया महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आता है तो उसे जांच में शामिल किया जाएगा। ऐसी स्थिति में न्यायालय में पूरक चालान पेश किया जा सकता है।

600 पन्नों के चालान के साथ अब मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया न्यायालय में चलेगी। आरोप तय होने के बाद मामले में नियमित सुनवाई शुरू होगी। फिलहाल पुलिस की जांच डिजिटल साक्ष्यों और आरोपितों की कथित भूमिका पर केंद्रित है।