डेस्क : महाराष्ट्र की राजनीति में चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दलों की एकजुटता दिखाई दे रही है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने रविवार को मुंबई में चुनाव आयोग के खिलाफ बड़ा मार्च निकाला। इस प्रदर्शन को शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) और कांग्रेस का भी समर्थन मिला है।
ठाकरे बंधुओं ने इस मार्च को राजनीतिक दलों के झंडों से दूर रखते हुए केवल तिरंगा लेकर शामिल होने की अपील की। उनका मुख्य मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और महाराष्ट्र में चल रही SIR प्रक्रिया है। दोनों नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए SIR को रद्द करने की मांग की है।
शरद पवार की पार्टी ने दिया समर्थन
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने ठाकरे बंधुओं के मार्च को समर्थन देने की घोषणा की। पार्टी ने इससे पहले अभिजीत दीपके के विरोध प्रदर्शन को भी समर्थन दिया था। सुले ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और चुनाव आयोग की कथित मनमानी के खिलाफ होने वाले इन आंदोलनों का उनकी पार्टी समर्थन करती है।
चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष एकजुट
इस प्रदर्शन में कांग्रेस के नेताओं के भी शामिल होने की बात कही गई है। ऐसे में महाराष्ट्र में महाविकास आघाड़ी से जुड़े दल एक बार फिर चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे पर एक मंच पर नजर आ रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
राज ठाकरे ने SIR को महाराष्ट्र में पूरी तरह रद्द करने की मांग की है। वहीं उद्धव ठाकरे ने भी चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। दोनों नेताओं का कहना है कि चुनाव से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की रक्षा जरूरी है।
ठाकरे बंधुओं के इस साझा प्रदर्शन और शरद पवार गुट समेत कांग्रेस के समर्थन ने महाराष्ट्र की राजनीति में विपक्षी एकजुटता को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।








