डेस्क : चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में चल रहे प्रदर्शन से समाजवादी पार्टी ने दूसरे दिन भी दूरी बनाए रखी। बुधवार को दिल्ली में हुए प्रदर्शन में विपक्ष के कई दलों के सांसद शामिल हुए, लेकिन समाजवादी पार्टी का कोई सांसद नजर नहीं आया। सपा सांसदों की गैरमौजूदगी को लेकर कांग्रेस और सपा के बीच राजनीतिक तालमेल को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
राहुल गांधी लगातार दूसरे दिन प्रदर्शन में शामिल हुए। कांग्रेस की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर यह विरोध-प्रदर्शन किया जा रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में अनियमितताएं हुई हैं और चुनाव आयोग को इस मामले में जवाब देना चाहिए।
प्रदर्शन से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से विपक्षी सांसदों के लिए बैठक और भोज का आयोजन किया गया। इसमें विपक्ष के करीब 300 सांसदों के शामिल होने का दावा किया गया। इसके बाद सांसद प्रदर्शन के लिए आगे बढ़े। हालांकि, सपा की अनुपस्थिति ने राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी।
कांग्रेस और सपा लोकसभा चुनाव के बाद भी विपक्षी राजनीति में कई मुद्दों पर साथ नजर आते रहे हैं। हालांकि, दोनों दलों के बीच विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर रणनीति और प्राथमिकताओं को लेकर मतभेद भी सामने आते रहे हैं। ऐसे में राहुल गांधी के नेतृत्व वाले इस प्रदर्शन से सपा की दूरी को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उधर, कांग्रेस ने चुनाव आयोग के खिलाफ अपना अभियान जारी रखने के संकेत दिए हैं। राहुल गांधी ने कहा है कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने राहुल गांधी समेत कांग्रेस के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया।
सपा की ओर से प्रदर्शन में सांसदों की गैरमौजूदगी को लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में सपा इस मुद्दे पर कांग्रेस के साथ खड़ी होती है या अपना अलग राजनीतिक रुख बनाए रखती है।








