विरोध के बीच चुनाव आयोग का विशेष अभियान, नए और छूटे मतदाताओं को मिलेगा मौका

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डेस्क : चुनावी मतदाता सूची में नामों को लेकर विपक्ष के लगातार विरोध और चुनाव आयोग पर उठ रहे सवालों के बीच आयोग ने पात्र मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। यह अभियान उन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चलाया जा रहा है, जहां विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। आयोग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कोई भी पात्र मतदाता मतदाता सूची से बाहर न रहे।

आयोग के निर्देश के मुताबिक, संबंधित राज्यों में बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) पुराने और नए मतदाता रिकॉर्ड की तुलना करेंगे। इस दौरान ऐसे लोगों की पहचान की जाएगी, जिनके नाम पहले की मतदाता सूची में थे, लेकिन पुनरीक्षण के बाद सूची में नहीं हैं। इसके बाद पात्र लोगों से संपर्क कर उनका नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

नए मतदाताओं को भी अभियान में शामिल किया

विशेष अभियान में पहली बार मतदान करने वाले युवाओं और अन्य पात्र नए मतदाताओं को भी शामिल किया गया है। ऐसे मतदाताओं के लिए सामान्य फॉर्म-6 के जरिए आवेदन की व्यवस्था की गई है। जिन राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां फॉर्म-6 के साथ एसआईआर के दौरान जोड़ा गया अतिरिक्त घोषणा संबंधी सवाल नहीं पूछा जाएगा।

बीएलओ को जरूरत के अनुसार घर-घर जाकर पात्र मतदाताओं की पहचान करने और आवेदन भरवाने में मदद करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने अधिकारियों से कहा है कि मतदाता सूची में नाम शामिल करने के मामलों में जल्दबाजी में नकारात्मक फैसला न लिया जाए और संबंधित निर्वाचन अधिकारी स्तर पर पूरी जांच की जाए।

विपक्ष के प्रदर्शन के बीच आया फैसला

आयोग का यह कदम ऐसे समय आया है जब विपक्षी दल विशेष गहन पुनरीक्षण और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्षी सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है और एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। बुधवार को भी विपक्षी सांसदों ने दिल्ली में प्रदर्शन किया और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया।

हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि उसका विशेष अभियान पात्र मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करने की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि पात्र मतदाता का नाम सूची से बाहर नहीं रहना चाहिए और उसके मताधिकार में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए।

आयोग के इस अभियान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब एसआईआर को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार तेज है। एक ओर विपक्ष मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, वहीं आयोग पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर अभियान चला रहा है।