डेस्क : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से विपक्षी प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात के बाद ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान पर भाजपा ने सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया को लेकर भ्रामक दावे कर रही है और राष्ट्रपति के साथ हुई मुलाकात को भी राजनीतिक रंग दे रही है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से मुलाकात कर चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ज्ञापन सौंपते हुए चुनाव व्यवस्था से जुड़े अपने सवालों और मांगों को राष्ट्रपति के समक्ष रखा।
मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने दावा किया कि राष्ट्रपति ने विपक्ष के ‘वोट चोरी’ संबंधी आरोपों को खारिज नहीं किया और उनसे सबूत मांगे। उन्होंने कहा कि विपक्ष अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए तैयार है।
राहुल के दावे पर भाजपा का पलटवार
भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि राष्ट्रपति के साथ हुई बातचीत को इस तरह प्रस्तुत करना उचित नहीं है, जिससे यह संदेश जाए कि उन्होंने विपक्ष के आरोपों को स्वीकार कर लिया है। भाजपा ने कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक विवाद में खींचने का आरोप लगाया।
सरकारी सूत्रों ने भी राष्ट्रपति द्वारा विपक्ष के आरोपों को स्वीकार किए जाने संबंधी दावे पर असहमति जताई। इस मुद्दे ने सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच पहले से जारी राजनीतिक खींचतान को और तेज कर दिया है।
चुनावी प्रक्रिया पर आमने-सामने सत्तापक्ष और विपक्ष
विपक्ष लगातार चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच और निर्वाचन आयोग की जवाबदेही की मांग उठा रहा है। वहीं, भाजपा विपक्ष के आरोपों और उनके आधार पर सवाल खड़े कर रही है। विपक्ष ने चुनाव में बैलेट पेपर के इस्तेमाल की मांग भी दोहराई है।
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद अब विवाद का केंद्र केवल चुनावी अनियमितताओं के आरोप ही नहीं, बल्कि उस मुलाकात के बाद दिए गए बयानों की व्याख्या भी बन गई है। कांग्रेस अपने आरोपों पर कायम है, जबकि भाजपा राहुल गांधी के दावों को चुनौती दे रही है। ऐसे में चुनावी पारदर्शिता और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस आगे भी जारी रहने के आसार हैं।








