डेस्क : भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया है कि वह परमाणु हथियारों की धमकियों और दबाव के आगे नहीं झुकेगा। भारतीय राजनयिक अनमोल शेर सिंह बेदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम समिति की बैठक में आतंकवाद, परमाणु हथियारों और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर पाकिस्तान के आरोपों का जवाब दिया।
बेदी ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा करना भारत का अधिकार है और परमाणु धमकियों के जरिए इस अधिकार को सीमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए मई में भारत की सैन्य कार्रवाई को आत्मरक्षा में उठाया गया कदम बताया। भारत के अनुसार, यह कार्रवाई लक्षित और संतुलित थी, जिसका उद्देश्य संघर्ष को व्यापक होने से रोकना था।
परमाणु हथियारों को दबाव का औजार न बनाए पाकिस्तान
भारतीय राजनयिक ने कहा कि परमाणु हथियारों को कूटनीति के सामान्य औजार की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम और अतीत में सामने आए ए.क्यू. खान नेटवर्क का उल्लेख करते हुए परमाणु प्रसार को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सतर्क रहने की आवश्यकता बताई।
भारत ने यह भी कहा कि आतंकवाद को प्रायोजित करने वालों और उसकी साजिश रचने वालों के बीच अंतर नहीं किया जा सकता। किसी देश की जिम्मेदारी केवल इसलिए समाप्त नहीं हो जाती कि हिंसा को गैर-सरकारी संगठन अंजाम देते हैं।
सिंधु जल संधि और कश्मीर का मुद्दा भी उठा
अपने संबोधन में बेदी ने सिंधु जल संधि का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे समझौते आपसी विश्वास और सहयोग पर आधारित होते हैं। भारत ने जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा बताते हुए पाकिस्तान से भारतीय क्षेत्रों पर अवैध कब्जा समाप्त करने की मांग भी दोहराई।
भारत ने कहा कि वह शांति का समर्थक है, लेकिन शांति बनाए रखने के लिए गैर-जिम्मेदाराना गतिविधियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। भारतीय पक्ष ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद और परमाणु धमकियों के जरिए भारत की सुरक्षा नीति को प्रभावित नहीं किया जा सकता।








