सीजेपी के प्रदर्शन पर भाजपा का वार, रविशंकर प्रसाद ने विपक्ष को घेरा

0

डेस्क : मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन और विपक्षी दलों की गतिविधियों को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि चुनावी हार से निराश विपक्ष सड़क पर प्रदर्शन को राजनीतिक हथियार बना रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में हो रही गतिविधियों के कारण आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

शनिवार को दिल्ली में सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शन के बीच पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। इसके बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई। भाजपा ने प्रदर्शन के पीछे विपक्ष की राजनीतिक मंशा पर सवाल उठाए, जबकि विपक्ष की ओर से निर्वाचन प्रक्रिया और मुख्य निर्वाचन आयुक्त की भूमिका को लेकर विरोध जताया जा रहा है।

ईवीएम के बाद अब एसआईआर पर सवाल: भाजपा

रविशंकर प्रसाद ने विपक्ष की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उठाए जा रहे सवालों का भी जवाब दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष चुनाव में हार के बाद कभी ईवीएम तो कभी मतदाता सूची की प्रक्रिया पर सवाल उठाता है। भाजपा नेता ने कहा कि एसआईआर का प्रावधान कानून में मौजूद है और इसका उद्देश्य मतदाता सूची को दुरुस्त करना है।

प्रसाद ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर उठ रहे सवालों पर कहा कि मृत व्यक्तियों, दूसरे क्षेत्रों में स्थानांतरित हो चुके लोगों और दोहरी प्रविष्टियों की जांच आवश्यक है। उन्होंने इस प्रक्रिया से जुड़े आंकड़े भी पेश किए और विपक्ष को उनके आधार पर अपनी आपत्तियां संबंधित मंचों पर उठाने की चुनौती दी।

प्रदर्शन के अधिकार पर भी बहस

भाजपा नेता ने कहा कि उनकी पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से होने वाले विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ नहीं है, लेकिन उनके अनुसार सड़क पर प्रदर्शन को राजनीतिक दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल करना उचित नहीं है। उन्होंने हाल के उपचुनावों में भाजपा और उसके सहयोगियों के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए इसे जनता के समर्थन का संकेत बताया।

दूसरी ओर, मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ विरोध और एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने अपनी आपत्तियां जारी रखी हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने निर्वाचन प्रक्रिया, मतदाता सूची की पारदर्शिता और लोकतंत्र में विरोध के अधिकार को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।