विदेश नीति से निर्वाचन आयोग तक, अशोक गहलोत ने केंद्र को घेरा

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जयपुर : राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए गहलोत ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विदेशी ताकतों के सामने झुक रही है, जबकि विपक्ष पर देश को अस्थिर करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना और उसकी नीतियों का विरोध करना विपक्ष का अधिकार है।

राहुल गांधी के समर्थन में कांग्रेस का पलटवार

गहलोत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज करते हुए भाजपा की राजनीतिक सोच पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के माध्यम से देश में एकता और सद्भाव का संदेश देने का प्रयास किया था। ऐसे में उन पर देश को अस्थिर करने के आरोप लगाना उचित नहीं है।

कांग्रेस नेता ने भाजपा से सवाल किया कि जब वह विपक्ष में रहते हुए आंदोलन करती थी और सरकार की नीतियों का विरोध करती थी, तब क्या उसके आंदोलनों को भी देश को अस्थिर करने की कोशिश माना जाना चाहिए था? उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए राजनीतिक आरोपों का सहारा ले रही है।

निर्वाचन आयोग को लेकर भी उठाए सवाल

गहलोत ने निर्वाचन आयोग से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष के विरोध और प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने विपक्षी सांसदों को प्रदर्शन के दौरान रोके जाने और दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए कई तरह की पाबंदियां लगाई गईं। गहलोत ने इन घटनाओं को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष अलग हो सकता है।

विदेश नीति पर भी साधा निशाना

कांग्रेस नेता ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों, भारत पर लगाए गए टैरिफ और वीजा संबंधी नीतियों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा विपक्ष पर विदेशी ताकतों के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाती है, जबकि सरकार को खुद अंतरराष्ट्रीय मामलों में अपने रुख को स्पष्ट करना चाहिए।

गहलोत के इस बयान से भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के आसार हैं। निर्वाचन आयोग, विपक्ष के विरोध के अधिकार और केंद्र की विदेश नीति को लेकर दोनों दलों के बीच टकराव एक बार फिर चर्चा में आ गया है।