तमिलनाडु की सियासत में नया विवाद, डीएमके ने विजय को बताया ‘आरएसएस का गोद लिया बच्चा’

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डेस्क : तमिलनाडु की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होता नजर आ रहा है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने मुख्यमंत्री थलपति विजय पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा की है। पार्टी ने इस तस्वीर के जरिए विजय के हाथ के एक इशारे की तुलना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ध्वज प्रणाम मुद्रा से की और उन्हें ‘आरएसएस का गोद लिया बच्चा’ बताया। डीएमके की इस टिप्पणी के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।

हाथ के इशारे को लेकर डीएमके का हमला

डीएमके की सूचना प्रौद्योगिकी शाखा की ओर से साझा की गई तस्वीर में विजय के चर्चित हाथ के इशारे को आरएसएस की ध्वज प्रणाम मुद्रा से जोड़कर दिखाया गया है। पार्टी ने इस तुलना के जरिए मुख्यमंत्री विजय की राजनीतिक विचारधारा पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, आरएसएस से उनके कथित संबंधों को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब डीएमके और विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार चर्चा में बनी हुई है।

विधानसभा में भी दिखा था राजनीतिक टकराव

विजय का हाथ का इशारा इससे पहले भी राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है। विधानसभा की कार्यवाही के दौरान विजय ने डीएमके प्रमुख एम.के. स्टालिन के चर्चित इशारे की नकल करते हुए राजनीतिक कटाक्ष किया था। इस घटनाक्रम के बाद डीएमके विधायकों ने विरोध जताया था और सदन में तनाव देखने को मिला था।

इसके बाद विजय के इस इशारे को लेकर सामाजिक माध्यमों पर भी चर्चा हुई। अब डीएमके ने इसी मुद्दे को आरएसएस से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री पर निशाना साधा है।

डीएमके और विजय की पार्टी के बीच बढ़ती खींचतान

तमिलनाडु की राजनीति में डीएमके और तमिलगा वेत्री कड़गम के बीच मुकाबला लगातार अहम होता जा रहा है। डीएमके पहले भी विजय की पार्टी पर भारतीय जनता पार्टी के प्रति नरम रुख अपनाने और उसे राजनीतिक रूप से फायदा पहुंचाने के आरोप लगाती रही है। दूसरी ओर, विजय की पार्टी राज्य की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रही है।

डीएमके की ताजा पोस्ट को इसी राजनीतिक संघर्ष के संदर्भ में देखा जा रहा है। पार्टी ने तस्वीर के माध्यम से विजय पर वैचारिक सवाल उठाए हैं। हालांकि, आरएसएस से उनके कथित संबंधों के बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए स्वतंत्र और पुष्ट प्रमाण जरूरी हैं।

फिलहाल, हाथ के एक इशारे से शुरू हुई यह बहस सामाजिक माध्यमों से आगे बढ़कर तमिलनाडु की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का नया मुद्दा बन गई है।