जेलेंस्की का सख्त रुख, रूसी तेल ठिकानों पर फिर हमले करेगा यूक्रेन

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डेस्क : रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने को लेकर बनी सहमति टूटती नजर आ रही है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका देश अब रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोककर नहीं रखेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर घोषित एनर्जी सीजफायर के बावजूद रूस की ओर से यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे पर हमले जारी रहने का आरोप लगाते हुए कीव ने अपनी रणनीति में बदलाव के संकेत दिए हैं।

रूसी तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमले का आरोप

रूस के रियाजान क्षेत्र में स्थित एक तेल रिफाइनरी को निशाना बनाए जाने की खबर के बाद तनाव और बढ़ गया है। यह क्षेत्र मॉस्को के दक्षिण-पूर्व में स्थित है। रूसी अधिकारियों के अनुसार, यूक्रेन की ओर से बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले की कोशिश की गई, जिसके बाद रिफाइनरी परिसर में आग लग गई। रूस ने दावा किया कि हमले में इस्तेमाल किए गए कई ड्रोन और मिसाइलों को रोक दिया गया था।

वहीं, अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यूक्रेन ने ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले सीमित रखने के लिए कुछ दिनों तक संयम बरता था। लेकिन रूस की ओर से यूक्रेन के बिजली और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाए जाने के बाद यह व्यवस्था ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सकी।

जेलेंस्की ने कहा- अब और संयम नहीं

यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में संकेत दिया कि रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले फिर से शुरू किए जाएंगे। उनका कहना है कि यूक्रेन ने युद्ध को कम करने की दिशा में कदम उठाते हुए कुछ समय तक अपने हमलों को सीमित रखा, लेकिन रूस की ओर से वैसा ही कदम नहीं उठाया गया।

जेलेंस्की ने अमेरिकी पहल के तहत बनी इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऊर्जा प्रतिष्ठानों को लेकर एकतरफा संयम यूक्रेन के हित में नहीं है। कीव का तर्क है कि यदि रूस यूक्रेन के बिजली संयंत्रों और अन्य महत्वपूर्ण ऊर्जा ठिकानों पर हमले जारी रखता है, तो यूक्रेन से रूसी ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने की अपेक्षा करना उचित नहीं है।

ट्रंप की पहल को झटका, अमेरिका-यूक्रेन संबंधों में तनाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने की व्यवस्था की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाए जाने से रोकना और युद्ध के आर्थिक प्रभावों को सीमित करना था।

हालांकि, इस घोषणा के क्रियान्वयन और दोनों पक्षों की सहमति को लेकर शुरुआत से ही सवाल उठते रहे। जेलेंस्की ने आरोप लगाया है कि रूस के खिलाफ कार्रवाई सीमित करने का दबाव यूक्रेन पर अधिक डाला जा रहा है। उन्होंने अमेरिका के साथ खुफिया जानकारी साझा करने और सैन्य सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भी चिंता जताई है।

दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप ने यूक्रेन के साथ खुफिया जानकारी साझा करना बंद किए जाने की बात से इनकार किया है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ता मतभेद युद्ध के दौरान यूक्रेन को मिलने वाली अमेरिकी सहायता पर सवाल खड़े कर रहा है।

आगे और तेज हो सकता है युद्ध

ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों की वापसी से रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष और गंभीर होने की आशंका है। तेल रिफाइनरियां, बिजली संयंत्र और अन्य ऊर्जा सुविधाएं दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। इन पर हमलों का असर ईंधन आपूर्ति, बिजली व्यवस्था और युद्ध से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।

फिलहाल, ऊर्जा संघर्षविराम को दोबारा लागू कराने की संभावनाएं अनिश्चित बनी हुई हैं। यदि दोनों पक्ष ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने को लेकर किसी प्रभावी व्यवस्था पर सहमत नहीं होते हैं, तो आने वाले दिनों में युद्ध और तेज हो सकता है।