संजय राउत की मुश्किलें बढ़ीं, न्यायपालिका पर टिप्पणी को लेकर सर्वोच्च न्यायालय सख्त

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डेस्क : शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के राज्यसभा सांसद संजय राउत की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायपालिका को लेकर की गई टिप्पणियों पर सर्वोच्च न्यायालय ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को चुनौती देने वाली विपक्षी नेताओं की याचिका में संजय राउत की भागीदारी पर फिलहाल अस्थायी रूप से विचार किया जा रहा है। इस संबंध में उन्हें अपने आचरण को लेकर जवाब देना होगा।

सर्वोच्च न्यायालय ने क्या कहा?

१५ अक्टूबर २०२६ को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।

अदालत ने कहा कि संजय राउत की याचिका पर फिलहाल अस्थायी आधार पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए उन्हें अपने आचरण के संबंध में स्पष्टीकरण देना होगा। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने पहले ही उनके आचरण को गलत ठहरा दिया है।

राहुल गांधी से मुलाकात को लेकर शुरू हुआ विवाद

विवाद उस समय शुरू हुआ, जब राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली तथा मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात का अनुरोध किया था।

मुख्य न्यायाधीश द्वारा मुलाकात से इनकार किए जाने के बाद संजय राउत ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जाहिर की। उन्होंने न्यायपालिका के कामकाज और न्यायाधीशों की राजनीतिक नेताओं के साथ कथित मुलाकातों को लेकर सवाल उठाए।

राउत ने दावा किया कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के कई न्यायाधीश लंदन में राजनीतिक नेताओं के साथ बैडमिंटन खेलते नजर आए थे। उन्होंने विपक्षी नेताओं को मुलाकात का समय नहीं दिए जाने पर भी सवाल उठाए।

हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय बार संघ ने संबंधित तस्वीरों को लेकर कहा कि वे लंदन की नहीं, बल्कि नवंबर २०२५ में नई दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में आयोजित एक कार्यक्रम की थीं।

संजय राउत के खिलाफ न्यायालय की अवमानना का मामला

मुख्य न्यायाधीश और न्यायपालिका पर की गई टिप्पणियों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय बार संघ ने संजय राउत और पत्रकार निखिल वागले के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की थी।

१५ अक्टूबर को महान्यायवादी आर. वेंकटरमणी ने इस संबंध में सहमति दे दी। यह घटनाक्रम न्यायपालिका की गरिमा, सार्वजनिक आलोचना और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ले आया है।

हालांकि, अवमानना की कार्यवाही के लिए सहमति मिलना अपने आप में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। इस मामले में अंतिम निर्णय न्यायालय की आगे की कार्यवाही पर निर्भर करेगा।

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण मामले में भी सुनवाई

सर्वोच्च न्यायालय में राहुल गांधी समेत विपक्षी दलों के नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर याचिका दाखिल की है। याचिका में कथित चुनावी अनियमितताओं की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की मांग की गई है।

अदालत ने इस मामले में चुनाव आयोग और संबंधित निर्वाचन अधिकारियों से जवाब मांगा है। संजय राउत भी इस याचिका के याचिकाकर्ताओं में शामिल हैं।

अब संजय राउत की ओर से दिए जाने वाले स्पष्टीकरण और अदालत के अगले निर्देशों पर नजर रहेगी। आगे की न्यायिक कार्यवाही से स्पष्ट होगा कि अदालत उनके आचरण को लेकर क्या रुख अपनाती है।