मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा पाने वाली मुस्कान रस्तोगी ने अब इस फैसले को चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है। मुस्कान ने जेल अधीक्षक से मुलाकात कर उच्च न्यायालय में अपील करने की प्रक्रिया समझने और कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। इस मामले में मुस्कान के साथ उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को भी मौत की सजा सुनाई गई है।
उच्च न्यायालय में अपील की तैयारी
लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को अदालत से मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद मुस्कान ने गुरुवार सुबह जेल प्रशासन से संपर्क किया। उसने वरिष्ठ जेल अधीक्षक से उच्च न्यायालय में अपील करने की प्रक्रिया बताने और कानूनी मदद दिलाने का अनुरोध किया।
जेल प्रशासन अब अदालत से सजा के आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू करेगा। नियमानुसार, सजा के खिलाफ अपील दाखिल करने के लिए निर्धारित समयसीमा का ध्यान रखना होगा। मुस्कान और साहिल के पास इस फैसले को चुनौती देने का कानूनी विकल्प मौजूद है।
परिवार ने भी बनाई दूरी
मुस्कान के परिवार ने मामले में उससे दूरी बना ली है। रिपोर्ट के मुताबिक, उसके परिजनों का कहना है कि उसे अपने अपराध की सजा मिली है। वहीं, मृतक सौरभ राजपूत के परिवार ने भी स्पष्ट किया है कि वे न्याय के लिए अपनी कानूनी लड़ाई आगे तक जारी रखेंगे।
सौरभ के परिजनों का कहना है कि वे इस मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया में भी सक्रिय रहेंगे। ऐसे में अब इस प्रकरण की अगली लड़ाई उच्च न्यायालय में होने की संभावना है।
क्या है पूरा नीले ड्रम हत्याकांड?
मेरठ का यह मामला मार्च २०२५ में सामने आया था। सौरभ राजपूत की हत्या के बाद उसके शव के टुकड़े कर उन्हें सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपा दिया गया था। इस घटना ने पूरे देश में सनसनी फैला दी थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला की भूमिका सामने आई थी। पुलिस जांच और सुनवाई के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोनों को दोषी ठहराया।
१४ अक्टूबर २०२६ को मेरठ की अदालत ने दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। अदालत ने अपराध की गंभीरता और उसकी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इसे अत्यंत जघन्य मामला माना।
अदालत के फैसले को चुनौती देने का अधिकार
मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद भी कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं होती। इस तरह की सजा को लागू करने से पहले उच्च न्यायालय की पुष्टि आवश्यक होती है। दोषियों को फैसले के खिलाफ अपील करने का भी अधिकार है।
अब मुस्कान और साहिल की ओर से संभावित अपील तथा उच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई इस मामले की आगे की दिशा तय करेगी। फिलहाल मुस्कान ने जेल प्रशासन से कानूनी सहायता मांगी है और वह अपनी सजा के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रही है।









